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मिसाइल की मिसफायरिंग | 17 Mar 2022 | आंतरिक सुरक्षा

यह एडिटोरियल 16/03/2022 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “A Misfiring and Its Trail of Poor Strategic Stability” लेख पर आधारित है। इसमें हाल में ‘मिसाइल मिसफायरिंग’ की घटना से उजागर हुए प्रमुख मुद्दे के संबंध में चर्चा की गई है।

संदर्भ

हाल ही में एक भारतीय मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्तानी क्षेत्र में प्रवेश कर जाने से दो परमाणु-सशस्त्र देशों के मध्य गंभीर तनाव में अनपेक्षित वृद्धि हो सकती थी। यह घटना दोनों देशों द्वारा परमाणु हथियारों की रखे जाने के खतरों के बारे में गंभीर आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता को मांग रखती है। इस घटना ने भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी हथियार प्रणालियों के भंडारण, रखरखाव, संचालन और यहाँ तक कि इंजीनियरिंग के मानकों के संबंध पर एक संदेह उत्पन्न किया है। इससे भी अधिक उल्लेखनीय यह है कि इस घटना ने दो परमाणु-संपन्न शत्रु देशों के बीच संकट प्रबंधन के लिये द्विपक्षीय तंत्र की दयनीय स्थिति को उजागर किया है जहाँ मिसाइल उड़ान का समय मुश्किल से कुछ ही मिनटों का होता है।

घटनाक्रम और प्रतिक्रिया 

क्षेत्र की रणनीतिक अस्थिरता के कारण 

दक्षिण एशिया (विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान भूभाग) में रणनीतिक स्थिरता व्यवस्था ऐसी दुर्घटनाओं से निपटने के लिये या प्रभावी संकट प्रबंधन एवं प्रतिरोध स्थिरता के लिये अधिक सक्षम नहीं है। इसके प्रमुख कारण हैं:

बैलिस्टिक मिसाइल उड़ान परीक्षण पूर्व-अधिसूचना समझौता, 2005’ 

आगे की राह

अभ्यास प्रश्न: ‘‘हाल ही में मिसाइल मिसफायरिंग की घटना ने भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी हथियार प्रणालियों के रख-रखाव और संचालन के मानकों पर एक संदेह उत्पन्न किया है। इससे भी अधिक उल्लेखनीय यह है कि इस घटना ने दो परमाणु-संपन्न शत्रु देशों के बीच संकट प्रबंधन हेतु द्विपक्षीय तंत्र की कमज़ोर स्थिति को उजागर किया है’’ टिप्पणी कीजिये।