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भुखमरी: एक वैश्विक चुनौती | 21 Oct 2021 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल 18/10/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “Alarming hunger or statistical artefact?” लेख पर आधारित है। इसमें भारत में व्याप्त कुपोषण की समस्या और इस संदर्भ में सरकार द्वारा किये गए प्रयासों की चर्चा की गई है।

संदर्भ

भारत 116 देशों के ’वैश्विक भुखमरी सूचकांक-2021’ (GHI) में 94वें (वर्ष 2020) स्थान से फिसलता हुआ 101वें स्थान पर पहुँच गया है। 38.8 के स्कोर के साथ, भारत में व्याप्त भुखमरी का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी का है। इसने भारत की पोषण नीति में परिवर्तन लाने की तात्कालिकता और आवश्यकता को प्रकट किया है।

‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक’ के निष्कर्ष

वैश्विक भुखमरी सूचकांक के कुल चार घटक हैं। इन चार घटकों में भारत का प्रदर्शन इस प्रकार है—  

कुपोषण के कारण

सरकार का हस्तक्षेप

आगे की राह

निष्कर्ष

अभ्यास प्रश्न: भुखमरी और कुपोषण की समाप्ति के लिये भारत को अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। चर्चा कीजिये। इसके साथ ही, वर्ष 2022 और उसके बाद के वैश्विक भुखमरी सूचकांकों में भारत द्वारा अपनी रैंकिंग में सुधार के लिये कुछ उपाय सुझाइये।