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केंद्रशासित प्रदेशों के संरचनात्मक मुद्दे | 26 Feb 2021 | भारतीय राजनीति

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में ऐसे कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों की समीक्षा की गई है जो केंद्रशासित प्रदेशों में चुनी हुई सरकारों को कमज़ोर करने की संभावनाओं को जन्म देते हैं, साथ ही इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ:

हाल ही में पुद्दुचेरी विधानसभा के कुछ विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, यह विधानसभा के सदस्यों द्वारा इस्तीफा देने के एक परिचित पैटर्न को दर्शाता है। इस तरह के इस्तीफे सदन में सत्ताधारी दल के बहुमत को अचानक से कम कर देते हैं, जो आगे चलकर सरकार गिरने का कारण बनता है। इस पैटर्न के पीछे मंशा यह है कि किसी भी दल बदलने वाले विधायक को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किये जाने के संकट का सामना न करना पड़े। सामान्य तौर पर इस प्रकार के इस्तीफे ऐसे केंद्रशासित प्रदेशों के सत्तारूढ़ दलों से होते हैं जो केंद्र में सत्तारूढ़ दल के विरोधी होते हैं।

हालाँकि यह एकमात्र तरीका नहीं है जिसके माध्यम से केंद्रशासित प्रदेशों में चुनी हुई सरकारों को कमज़ोर किया जाता है। ऐसे कई संवैधानिक और कानूनी प्रावधान हैं जो भारतीय संघ की इकाइयों के रूप में केंद्रशासित प्रदेशों (संघ शासित प्रदेशों) की संरचनात्मक कमज़ोरी को दर्शाते हैं।

केंद्रशासित प्रदेशों की संरचनात्मक कमज़ोरी:

आगे की राह:

निष्कर्ष: केंद्र सरकार को उन तर्कों/कारकों का सम्मान करना चाहिये जिनके आधार पर देश के कुछ केंद्रशासित प्रदेशों को एक विधायिका और मंत्रिपरिषद प्रदान करने के लिये उपयुक्त माना गया था। इसका एक प्रत्यक्ष कारण इन प्रदेशों में रह रहे लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा करना है।

इस संदर्भ में केंद्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी पर ध्यान देना चाहिये, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन केंद्र सरकार द्वारा संचालित किया जाता है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि केंद्रशासित प्रदेशों का केंद्र सरकार में विलय हो जाए। वे केंद्र द्वारा प्रशासित होते हैं परंतु अपने आप में एक स्वतंत्र इकाई भी हैं।

अभ्यास प्रश्न: ऐसे केंद्रशासित प्रदेश जिनकी अपनी विधानसभा हो, उनमें केंद्रीय प्रशासक (जैसे-उपराज्यपाल) को पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण की शक्ति देना प्रशासन का व्यावहारिक मॉडल नहीं है। टिप्पणी कीजिये।