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शासन के लिये प्रोत्साहन | 16 Oct 2021 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल 13/10/2021 को ‘हिंदू बिज़नेसलाइन’ में प्रकाशित ‘‘A stimulus for governance’’ लेख पर आधारित है। इसमें मंत्रिमंडल में पूर्व-नौकरशाहों को शामिल किए जाने से संबद्ध लाभों और समस्याओं की चर्चा की गई है।

प्रायः इस विषय पर चर्चा की जाती है कि स्वतंत्रता के बाद से भारत, अपनी नीतियों के कुशल निष्पादन में पूर्ण सफल नहीं रहा है अथवा नहीं। अंतरिक्ष और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में हुई भारी प्रगति के बावजूद, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, स्वच्छता, आवास और खाद्य सुरक्षा जैसे कई बुनियादी, लेकिन अत्यंत महत्त्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में भारत सदैव संघर्ष ही करता रहा है।

देश जब अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, तब यह उपयुक्त ही है कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिये वर्तमान सरकार ज़मीनी स्तर पर नीति कार्यान्वयन का प्रशिक्षण और अनुभव रखने वाले नौकरशाहों/पेशेवरों पर भरोसा जता रही है।

मंत्रिपरिषद (Council of Ministers- COMs) में पेशेवरों को कैबिनेट मंत्रियों के रूप में शामिल करना अब भारत में एक नया प्रतिमान ही बन गया है। इस निर्णय या दृष्टिकोण के अपने फायदे और नुकसान हैं और इसलिये इस दृष्टिकोण का मूल्यांकन किये जाने की आवश्यकता है।  

COMs में भूतपूर्व नौकरशाहों को शामिल किये जाने के लाभ

नौकरशाहों को मंत्रियों के रूप में शामिल करने की चुनौतियाँ

आगे की राह

निष्कर्ष

इस प्रकार, लगातार बढ़ती वैश्विक और घरेलू सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए, भारतीय संसदीय प्रणाली के लिये निर्वाचित प्रतिनिधियों और नौकरशाहों/पेशेवरों के बीच एक उपयुक्त संतुलन वर्तमान समय की मांग है।

सरकार के लिये शासन में सुधार और अपने लोगों तक सेवा की आपूर्ति के लिये दोनों की भागीदारी महत्त्वपूर्ण होगी।

अभ्यास प्रश्न: पूर्व-नौकरशाहों को कैबिनेट मंत्रियों के रूप में शामिल करने से भारत में नीति निर्माण और कार्यान्वयन को प्रभावी एवं कुशल बनाने में मदद मिल सकती है। मूल्यांकन कीजिये।