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संकट का दौर और आर्थिक सहायता | 28 Mar 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था के समक्ष मौज़ूद संकट से निपटने के लिये सरकार द्वारा घोषित उपायों पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस दिन-प्रति-दिन एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहा है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अब तक विश्व के लगभग 190 देश इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ चुके हैं और तकरीबन 500,000 से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। कोरोना वायरस की गंभीरता का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि इसके कारण अब तक वैश्विक स्तर पर तकरीबन 25,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वैश्विक समाज के समक्ष मौज़ूद इस महामारी के कारण विश्व की तमाम अर्थव्यवस्थाओं को न केवल मानव पूंजी के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी वे धीरे-धीरे संकट की और बढ़ रही हैं। भारत में भी स्थिति गंभीर रूप धारण कर रही है, कोरोना वायरस के कारण अब तक देश में 20 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 900 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। दुनिया भर में इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिये सरकारें भिन्न-भिन्न उपाय अपना रहे हैं, भारत में भी इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है, जो कि इस दिशा में एक सराहनीय कदम के रूप में देखा जा रहा है। किंतु सरकार के इस निर्णय से भारत के एक बड़े वर्ग के समक्ष आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो गई है और उन्हें दैनिक आधार पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 

इस स्थिति के मद्देनज़र हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दैनिक आधार पर चुनौती का सामना कर रहे लोगों और अर्थव्यवस्था को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से आर्थिक उपायों की घोषणा की है, जिसमें कोरोना वायरस के प्रति संवेदनशील तकरीबन सभी वर्गों को शामिल किया गया है। 

इस आलेख में वित्त मंत्री द्वारा की गई विभिन्न घोषणाओं का विश्लेषण कर यह जानने का प्रयास किया गया है कि सरकार द्वारा घोषित उपायों का अर्थव्यवस्था और आम जनमानस पर किस प्रकार का प्रभाव होगा।

देशव्यापी लॉकडाउन का प्रभाव

सरकार द्वारा घोषित उपाय

सरकार द्वारा की गई घोषणाओं का प्रभाव

संबंधित चिंताएँ

सुझाव

निष्कर्ष

भारत सहित विश्व के तमाम देश कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं और धीरे-धीरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं। इस आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौती को देखते हुए कई प्रकार के आर्थिक उपायों की घोषणा की है। उदाहरण के लिये इस महीने अमेरिका ने कोरोना वायरस (COVID-19) संचालित आर्थिक मंदी से निपटने के लिये 1 ट्रिलियन डॉलर का प्रस्ताव किया था, इसके अलावा जर्मनी ने कोरोना वायरस से प्रभावित हुई कंपनियों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से 610 बिलियन डॉलर के पैकेज की घोषणा की थी, इसी प्रकार कई अन्य देशों ने भी आर्थिक मोर्चे पर राहत प्रदान करने के लिये कई प्रकार के पैकेजों की घोषणा की है। भारत सरकार द्वारा घोषित उपाय दैनिक आधार पर चुनौतियों का सामना कर रह रहे मज़दूरों की दृष्टि से स्वागत योग्य हैं। हालाँकि कई विश्लेषकों का मत है कि सरकार द्वारा घोषित ये उपाय कोरोना वायरस संचालित आर्थिक मंदी से निपटने का केवल पहला कदम है और सरकार को दूसरे चरण के उपायों की घोषणा करने की आवश्यकता है, जिसमें निगमों और मध्यम वर्ग को भी शामिल किया जाए।

प्रश्न- कोरोना वायरस जनित मंदी से निपटने के लिये भारत सरकार द्वारा घोषित किये गए आर्थिक उपायों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये।