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सामाजिक उद्यमिता शासन | 24 Sep 2021 | शासन व्यवस्था

यह लेख 22/09/2021 को ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित ‘‘For the empowerment of social entrepreneurs, a five-point agenda’’ लेख पर आधारित है। इसमें सामाजिक उद्यमिता की चर्चा की गई है और भारत में सामाजिक उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के तरीके सुझाए गए हैं।

संदर्भ

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने सामाजिक उद्यमियों की उल्लेखनीय भूमिका और सामाजिक क्षेत्र के विकास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया है।  

इस अवधि के दौरान उन्होंने संसाधन जुटाने, जागरूकता के प्रसार, आवश्यक वस्तुओं/सेवाओं के वितरण, परामर्श देने, मिथकों को दूर करने, घरेलू देखभाल सेवाओं की सुनिश्चितता, सामुदायिक सेवा केंद्रों का निर्माण, परीक्षण की सुविधा और टीकाकरण अभियान में सहयोग के रूप में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से इतर सामाजिक उद्यम मुक्त बाज़ार में सक्रीय होते हैं। वे लाभकारी, गैर-लाभकारी अथवा मिश्रित—किसी भी प्रकार के हो सकते हैं। अब जबकि सामाजिक उद्यमियों की संख्या बढ़ी रही है, उन्हें सरकार से तत्काल सहायता की आवश्यकता है। 

सामाजिक उद्यमी और उनका महत्त्व

सामाजिक उद्यमियों को बढ़ावा देना

निष्कर्ष

यह आवश्यक है कि एक ऐसे संपोषणकारी पारितंत्र का विकास किया जाए, जो नए कार्यक्रम शुरू करने, महामारी-प्रेरित अंतराल को कम करने, मौजूदा पहलों का दायरा बढ़ाने और मुख्यधारा की अनुक्रिया प्रणाली का हिस्सा बनने हेतु सामाजिक उद्यमियों को प्रेरित करने हेतु महत्त्वपूर्ण हो।

सामाजिक उद्यमियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनकी अनुक्रियाओं का समर्थन कर हम उनके ज़मीनी प्रयासों को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं और भारत की समावेशी रिकवरी में मदद कर सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न: भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ने सामाजिक उद्यमियों की उल्लेखनीय भूमिका को उजागर किया है। चर्चा कीजिये कि भारत में सामाजिक उद्यमिता को किस प्रकार प्रोत्साहित किया जा सकता है।