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आपदा प्रबंधन में पंचायती राज संस्थानों की भूमिका | 09 Oct 2021 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल 08/10/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित ‘‘Stronger At The Grassroots’’ लेख पर आधारित है। इसमें कोविड-19 महामारी प्रबंधन में पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किये गए योगदान को देखते हुए आपदा रोधी कार्यक्रमों में उनकी संभावित भूमिका पर विचार किया गया है।

संदर्भ 

73वें संविधान संशोधन के माध्यम से देश के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने में स्थानीय निकायों को सशक्त करने हेतु उन्हें एक मज़बूत आधार प्रदान किया गया था। इस संशोधन के माध्यम से स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के रूप में पंचायतों की परिकल्पना की गई है। 

इस संदर्भ में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपदा पश्चात् प्रबंधन दोनों ही विषयों में ’पंचायती राज संस्थाओं’ (PRIs) की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 

दुर्भाग्य से, ये संस्थान अभी तक पूर्व-तैयारी चरण में या आपदा के दौरान और आपदा के बाद के अभियानों के दौरान प्रमुख भूमिका निभा सकने हेतु पूर्ण सशक्त नहीं बनाए गए हैं।  

भारत को, समग्र तौर पर विभिन्न आपदाओं से मुकाबला करने हेतु अपनी तैयारियों को अपनी मूल प्रणाली में एकीकृत करना चाहिये।  

पंचायती राज संस्थान और आपदा प्रबंधन

भारत में आपदा प्रबंधन: 

आपदा प्रबंधन में पंचायती राज संस्थाओं का महत्त्व

पंचायती राज संस्थाओं के समक्ष विद्यमान समस्याएँ

आगे की राह

अभ्यास प्रश्न: पंचायती राज संस्थाएँ स्पष्ट रूप से भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ हैं। लेकिन, वास्तव में, ये संस्थाएँ उस स्वायत्तता और शक्ति का उपभोग नहीं कर पा रही हैं जिसकी परिकल्पना भारतीय संविधान में की गई है। टिप्पणी कीजिये।