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NGO की भूमिका | 26 Sep 2020 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित “The G in NGO” लेख पर आधारित है। यह NGO और भारतीय लोकतंत्र में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका पर विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 2010 के अंतर्गत नए विनियमन के प्रभाव के बारे में विश्लेषण करता है।

संदर्भ

हाल ही में संसद ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, [Foregin Currency Regulation Act- (FCRA), 2010], 2010 में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये हैं। सरकार के अनुसार इन संशोधनों का उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों (Non-Governmental Organisations- NGO) के कामकाज में पारदर्शिता लाना है। हालाँकि इन नए नियमों ने गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों के लिये प्रतिकूल स्थितियाँ पैदा कर दी हैं, जिनके पास विदेशी संस्थाओं के साथ वित्तीय भागीदारी है। इस प्रकार कई नागरिक समाज समूह इन संशोधनों पर विशेष रूप से ऐसे समय में सवाल उठा रहे हैं जब देश को COVID-19 महामारी के हानिकारक प्रभावों सहित कई चुनौतियों से निपटने के लिये मज़बूत नागरिक समाज संगठनों और नेटवर्क की आवश्यकता है। इस प्रकार भारत के विकास में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका को देखते हुए गैर-सरकारी संगठनों की स्वायत्तता और गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त गैर-सरकारी संगठनों की जाँच करने के लिये सरकार की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।

कानून में प्रमुख संशोधन

इन संशोधनों से संबंधित चिंताएँ

भारतीय लोकतंत्र में गैर सरकारी संगठनों की भूमिका

भारत में लगभग 3.4 मिलियन गैर-सरकारी संगठन हैं जो हाशिए पर और वंचित समुदायों के लिये आपदा राहत से लेकर समर्थन तक के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। भारत जैसे विकासशील देश में भूमिका और ज़िम्मेदारियाँ बहुत अधिक हैं जिन्हें निम्नानुसार सूचीबद्ध किया जा सकता है:

NGO से संबंधित मुद्दे

निष्कर्ष

गैर-सरकारी संगठनों के लिये यह महत्त्वपूर्ण है कि वे न केवल अपने काम बल्कि अपनी वित्तीय स्थिति में भी उच्च स्तर की पारदर्शिता हासिल करें और उसे बनाए रखें। गैर सरकारी संगठनों को अपनी आय और व्यय को सार्वजनिक जांच के लिये खुला रखने की आवश्यकता है। हालाँकि किसी NGO की विश्वसनीयता का निर्धारण धन के स्रोत, देशी या विदेशी के पैमाना (Touchstone) के विरुद्ध नहीं किया जा सकता है। साथ ही सरकार को यह महसूस करना चाहिये कि राष्ट्रीय सीमाओं के पार विचारों और संसाधनों का सहज आदान-प्रदान वैश्विक समुदाय के कामकाज के लिये आवश्यक है और इसे तब तक हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिये जब तक कि यह मानने का कारण न हो कि धन का उपयोग अवैध गतिविधियों में सहायता के लिये किया जा रहा है।

NGO-Roles

मुख्य परीक्षा प्रश्न: भारतीय लोकतंत्र में गैर-सरकारी संगठनों (Non-Governmental Organisations- NGO) की भूमिका और NGO पर विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 2010 के अंतर्गत नए विनियमन के प्रभावों की चर्चा करें।