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काजीरंगा : पर्यावरण संरक्षण से उपजे सवाल | 17 Feb 2019 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सन्दर्भ :

वन्य जीव संरक्षण के मामले में काज़ीरंगा राष्ट्रीय पार्क की कामयाबी काफ़ी बड़ी है | असम में एक शताब्दी पहले जब इस पार्क की स्थापना की गई तो यहाँ गिने-चुने एक सींग वाले भारतीय गैंडे थे | अभी यहाँ एक सींग वाले 2400 गैंडे हैं, जो कि पूरी दुनिया के इस तरह के गैंडों की दो-तिहाई आबादी है | किन्तु, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाये जा रहे क़दमों को आज सवालिया निगाहों से देखा जा रहा है क्योंकि हाल ही में हुई कई मासूमों की मौत से शिकारियों की रोकथाम हेतु किये गए प्रयासों में पैबंद लगे हुए नज़र आ रहे है|

प्रमुख बिंदु :

पृष्ठभूमि :

मुखर विरोध एवं प्रदर्शन :

इंडिया में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संरक्षण प्रोग्राम को चलाने में मदद करने वाले डॉ दिपांकर घोष का मानना है कोई भी किसी को मारकर अच्छा महसूस नहीं करता है | सुरक्षा के लिए जो भी ज़मीन पर करने की ज़रूरत है उसे किया जा रहा है | अवैध शिकार रूकना चाहिए | डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, जो असम में वन विभाग का बड़ा साझेदार है और वन विभाग को उपकरण और फंड मुहैया कराता है, क्या इस दिशा में कोई कारगर प्रयास नहीं कर सकता?

निष्कर्ष :

सवाल यह है कि हमें विलुप्तप्राय जानवरों की सुरक्षा में कहाँ तक जाना चाहिए? निश्चित रूप से वन्यजीव संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण ही नहीं बल्कि एक पर्यावरणीय अनिवार्यता है किन्तु, विचारणीय है कि अवैध शिकार को रोकने के लिए किये गए प्रयासों की आड़ में आम व्यक्ति के जीवन से खिलवाड़ किया जाना किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा जा सकता |