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सार्वजनिक उपक्रम और विनिवेश | 22 Nov 2019 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश से संबंधित सरकार के हालिया निर्णय और उसके प्रभावों पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

देश में छाई आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिये केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में रणनीतिक विनिवेश का फैसला लिया है। गौरतलब है कि रणनीतिक विनिवेश के पहले चरण में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) सहित पाँच PSUs के कुछ भाग की बिक्री की जाएगी। सरकार के फैसले के संदर्भ में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि “सरकार ने निर्णय लिया है कि वह कई सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से कम करेगी।” विश्लेषक मान रहे हैं कि सरकार के इस निर्णय से राजकोष में काफी वृद्धि होगी जिसका प्रयोग सरकार द्वारा सार्वजनिक व्यय के रूप में किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु 

सरकार द्वारा निम्नलिखित पाँच सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक विनिवेश का फैसला लिया गया है;

निर्णय से संभावित परिणाम

रणनीतिक विनिवेश की आवश्यकता 

चुनौतियाँ भी हैं मौजूद 

विनिवेश का अर्थ

भारतीय विनिवेश नीति का विकासक्रम 

आगे की राह 

निष्कर्ष 

आवश्यक है कि सरकार विनिवेश को राजकोषीय अंतराल कम करने के एक उपकरण के रूप में प्रयोग न करे, बल्कि इस महत्त्वपूर्ण बजटीय व्यवस्था का प्रयोग भारत में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सुधार हेतु एक रणनीतिक योजना के हिस्से के रूप में किया जाना चाहिये। 

प्रश्न: सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश संबंधी सरकार के हालिया निर्णय की समीक्षा कीजिये।