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भारत की सौर ऊर्जा रणनीति | 13 Jul 2020 | भूगोल

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में भारत की सौर ऊर्जा रणनीति व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

उल्लेखनीय है कि भारत समृद्ध सौर ऊर्जा संसाधनों वाला देश है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर प्रयास किये हैं और उन्ही प्रयासों के तहत हाल ही में प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के रीवा में स्थापित 750 मेगावाट की ‘रीवा सौर परियोजना’ (Rewa Solar Project) को राष्ट्र को समर्पित किया। इस परियोजना में एक सौर पार्क जिसका कुल क्षेत्रफल 1500 हेक्टेयर है, के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250-250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। इस सौर पार्क के विकास के लिये भारत सरकार की ओर से ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’ को 138 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद प्रदान की गई थी। इस सौर पार्क को ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’ ने विकसित किया है जो ‘मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड’ और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (Solar Energy Corporation of India- SECI) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।

यह सौर परियोजना ‘ग्रिड समता अवरोध’ (Grid Parity Barrier) को तोड़ने वाली देश की पहली सौर परियोजना थी। यह परियोजना वार्षिक तौर पर लगभग 15 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी। यह परियोजना राज्य के बाहर संस्थागत ग्राहक को बिजली आपूर्ति करने वाली देश की पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना भी है। 

सौर ऊर्जा से तात्पर्य

भारत में सौर ऊर्जा की स्थिति

सौर ऊर्जा से होने वाले लाभ

सौर ऊर्जा की राह में चुनौतियाँ

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल 

राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन 

प्रयास योजना 

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

सोलर रूफटॉप योजना

अन्य नीतिगत उपाय

निष्कर्ष 

भारत में विगत एक दशक के दौरान बढ़ती आबादी, आधुनिक सेवाओं तक पहुँच, विद्युतीकरण की दर तेज होने और जीडीपी में वृद्धि की वजह से ऊर्जा की मांग तेज़ी से बढ़ी है और माना जाता है कि इसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय सौर ऊर्जा के ज़रिये आसानी से पूरा किया जा सकता है। देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिये न केवल बुनियादी ढाँचा मज़बूत करने की ज़रूरत है, बल्कि ऊर्जा के नए स्रोत तलाशना भी ज़रूरी है। ऐसे में, सौर ऊर्जा क्षेत्र भारत के ऊर्जा उत्पादन और मांगों के बीच की बढ़ती खाई को बहुत हद तक पाट सकता है। 

प्रश्न- सौर ऊर्जा स्वच्छ अक्षय ऊर्जा है, इसका अधिकतम दोहन देश के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने का काम करेगा और इसका लाभ देश की प्रगति में अनेक क्षेत्रों में उपलब्ध होगा। कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।