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जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु सहकारिता की आवश्यकता | 11 Jun 2022 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल 06/06/2022 को ‘द हिंदू बिज़नेस लाइन’ में प्रकाशित "Greening India Through Cooperatives" लेख पर आधारित है। इसमें जलवायु परिवर्तन प्रभावों के शमन में निकट भविष्य में विभिन्न सहकारी समितियों द्वारा निभाई जा सकने वाली महत्त्वपूर्ण भूमिका के संबंध में चर्चा की गई है।

वैश्विक तापमान में वृद्धि और विश्व भर में अतिरिक्त जन-विरोधाभासों के परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव के शमन के लिये अभिनव समाधान ढूँढने की आवश्यकता है। इस संबंध में स्थानीय स्तर पर अपने अनूठे समाधानों के साथ सहकारी समितियाँ (Co-operative societies/Co-operatives) जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम करने की दिशा में वैकल्पिक समाधान प्रदान कर सकती हैं। पर्याप्त धन और नीतिगत समर्थन के साथ सरकार द्वारा उनकी इस भूमिका में उल्लेखनीय सहयोग दिये जाने की आवश्यकता है 

सहकारी समितियाँ क्या हैं? 

भारत में सहकारी समितियों का समर्थन करने के लिये सरकार द्वारा क्या पहल की गई है? 

जलवायु परिवर्तन शमन में सहकारी समितियाँ कैसे महत्त्वपूर्ण हैं? 

कुछ वास्तविक उदाहरण  

सहकारी समितियों के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ  

आगे की राह  

अभ्यास प्रश्न: “सहकारिता क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं; हालाँकि अब तक इसे इष्टतम रूप से साकार नहीं किया गया है।’’ इस कथन के आलोक में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिये इस क्षेत्र की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग कर सकने हेतु उपाय सुझाएँ