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प्रवासी संकट व मनरेगा | 27 May 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में प्रवासी संकट व मनरेगा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

वैश्विक महामारी COVID-19 के कारण भारत ही नहीं विश्व के अधिकांश देशों में लॉकडाउन के विकल्प  को अपनाया गया है। इस समय भारत में जारी लॉकडाउन के दौरान श्रमिक वर्ग को पलायन जैसी गंभीर समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान होने वाला पलायन सामान्य दिनों की अपेक्षा होने वाले पलायन से एकदम उलट है। अमूमन हमने, रोज़गार पाने व बेहतर जीवन जीने की आशा में गाँवों और कस्बों से महानगरों की ओर पलायन होते देखा है परंतु इस समय महानगरों से गाँवों की ओर हो रहा पलायन नि:संदेह चिंताज़नक स्थिति को उत्पन्न कर रहा है।  इस स्थिति को ही जानकारों ने रिवर्स माइग्रेशन (Reverse Migration) की संज्ञा दी है। 

सामान्य शब्दों में रिवर्स माइग्रेशन से तात्पर्य ‘महानगरों और शहरों से गाँव एवं कस्बों की ओर होने वाले पलायन से है’। बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों का गाँव की ओर प्रवासन हो रहा है। लॉकडाउन के कुछ दिनों बाद ही काम-धंधा बंद होने की वजह से श्रमिकों का बहुत बड़ा हुजूम हजारों किलोमीटर दूर अपने घर जाने के लिये पैदल ही सड़कों पर उतर पड़ा। इस प्रवासी संकट को दूर करने के लिये, सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के रूप में मनरेगा के लिये 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आवंटित किया है।

इस आलेख में अर्थव्यवस्था में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका, प्रवासी संकट व रोज़गारविहीनता से निपटने में मनरेगा की भूमिका, उत्पन्न चुनौतियाँ तथा उनसे निपटने में अल्पकालिक व दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की जाएगी।   

अर्थव्यवस्था में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका 

प्रवासन से ऊत्पन्न चुनौतियाँ

प्रवासी संकट से निपटने में मनरेगा की भूमिका 

मनरेगा से संबंधित चुनौतियाँ

संभावित उपाय

प्रश्न- एकीकृत संसाधन प्रबंधन और रोज़गार सृजन में मनरेगा की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिये।