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हाथ से मैला ढोने (मैनुअल स्कैवेंजिंग) की प्रथा का उन्मूलन | 26 Nov 2020 | शासन व्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा या मैनुअल स्कैवेंजिंग की चुनौतियों और इसके उन्मूलन हेतु सरकार के प्रयासों के साथ इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ में कुछ संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया गया है। गौरतलब है कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट को देखने के बाद इस संशोधन को लाने का निर्णय लिया गया । इस रिपोर्ट में शामिल आँकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में देश में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (Manual scavenging) के कारण 376 लोगों की मृत्यु हो गई जबकि इसमें से 110 मौतें वर्ष 2019 में ही हुई थी। प्रस्तावित संशोधन के तहत सीवरों और सेप्टिक टैंकों की मशीनीकृत सफाई को अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है, साथ ही इसके उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने के लिये एक 24x7 हेल्पलाइन की स्थापना भी की जाएगी।

हालाँकि एक ऐसी समस्या जिसकी पैठ सामाजिक पदानुक्रम में अत्यधिक गहराई तक बनी हो, उसे समाप्त करने के लिये तकनीकी या कानूनी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे।  

‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (Manual scavenging):

मैनुअल स्कैवेंजिंग के विरुद्ध कानूनी प्रावधान और अन्य प्रयास : 

भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग की स्थिति :

मैनुअल स्कैवेंजिंग की व्यापकता के कारण:  

आगे की राह: 

निष्कर्ष:  वर्तमान में मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़े लोग देश के सबसे गरीब और सबसे वंचित समुदायों में से आते हैं। साथ ही यह कुप्रथा जाति और आर्थिक असमानता  से भी बहुत गहराई तक जुड़ी हुई है जिससे इस समस्या को रोक पाना बहुत कठिन हो गया है। मैनुअल स्कैवेंजिंग को समाप्त करने के लिये तकनीकी विकल्पों को बढ़ावा देने के साथ, सामाजिक जागरूकता और इस पेशे से जुड़े लोगों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान देना होगा।

अभ्यास प्रश्न:  मैनुअल स्कैवेंजिंग या मैला ढोने की कुप्रथा एक ऐसी समस्या जिसकी पैठ सामाजिक पदानुक्रम में अत्यधिक गहराई तक बनी हुई है और इसे समाप्त करने के लिये तकनीकी या कानूनी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे। चर्चा कीजिये।