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भारत में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ | 30 Aug 2022 | सामाजिक न्याय

यह एडिटोरियल 27/08/2022 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “Murder in the sewer: On deaths during manual cleaning of sewage” लेख पर आधारित है। इसमें भारत में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (Manual Scavenging) की समस्या और संबंधित चुनौतियों के बारे में चर्चा की गई है।

भारत में साफ-सफाई का कार्य अंतर्निहित रूप से पदानुक्रम और बहिष्करण की एक प्रणाली से जुड़ा हुआ है, जिसे हम जाति प्रथा के रूप में देखते हैं। बी.आर.अंबेडकर ने बलपूर्वक कहा था कि जाति प्रथा न केवल श्रम विभाजन की ओर ले जाती है बल्कि श्रमिकों का विभाजन भी करती है 

सभी प्रकार के सफाई कार्यों को ‘तुच्छ' या नीच कार्य माना जाता है और इसलिये यह कार्य सामाजिक पदानुक्रम के सबसे निचले पायदान के लोगों को सौंपा जाता है। सफाई कर्मचारी के रूप में मुख्यतः दलित व्यक्तियों को नियोजित किया जाता है, जहाँ वे हाथ से मैला ढोने वाले यामैनुअल स्कैवेंजर्स’ (Manual Scavengers), नालों की सफाई करने वाले, कचरा उठाने वाले और सड़कों की सफाई करने वाले के रूप में कार्य करते हैं 

सरकार के हाल के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 97 प्रतिशत मैनुअल स्कैवेंजर्स दलित वर्ग के हैं। 

हालाँकि मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा परमैनुअल स्कैवेंजर्सकेनियोजनका प्रतिषेध और उनका पुनर्वासअधिनियम, 2013’ के तहत प्रतिबंध आरोपित है, लेकिन फिर भी यह अमानवीय प्रक्रिया जारी है। 

भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा का कारण: 

मैनुअल स्कैवेंजिंग के प्रभाव: 

मैनुअल स्कैवेंजिंग की समस्या से निपटने के लिये उठाए गए कदम: 

भारत द्वारा मैनुअल स्कैवेंजिंग पर अंकुश लगाने के माध्यम: 

अभ्यास प्रश्न: हालाँकि भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा पर प्रतिबंध आरोपित है, लेकिन यह अमानवीय अभ्यास अब भी जारी है। समालोचनात्मक विश्लेषण करें।