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वस्तु एवं सेवा कर संग्रह में गिरावट: चिंता का विषय | 11 Aug 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में वस्तु एवं सेवा कर संग्रह में गिरावट व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (Goods and Services Tax Act) में इस बात की गारंटी दी गई है कि GST कार्यान्वयन (2017-2022) के पहले पाँच वर्षों में राजस्व में किसी भी नुकसान की भरपाई को उपकर (Cess) के माध्यम से पूरा किया जाएगा। कुछ समय पूर्व केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये वस्तु एवं सेवा कर मुआवज़ा जारी करने की घोषणा की थी। वस्तु एवं सेवा कर मुआवज़े की राशि 1,65,302 करोड़ रूपए निश्चित की गई। जबकि मुआवज़ा उपकर राशि का संग्रह 95,444 करोड़ रूपए था। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को बेहतर करने तथा वैश्विक महामारी COVID-19 महामारी हेतु राहत कार्यों को त्वरित करने में जुटे राज्यों को सहायता मिलेगी। 

यदि राजस्व संग्रह एक निश्चित सीमा से नीचे चला जाता है, तो राज्य सरकारों को क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिये फॉर्मूले पर फिर से निर्धारित करने का GST अधिनियम में प्रावधान किया गया है। GST अधिनियम के तहत यदि राज्यों का वास्तविक राजस्व अनुमानित राजस्व से कम संग्रहित होता है, तो इस अंतर की भरपाई की जाएगी। 

इस आलेख में वस्तु एवं सेवा कर की पृष्ठभूमि, GST राजस्व में गिरावट के कारण, क्षतिपूर्ति उपकर, GST परिषद की भूमिका और चुनौतियों इत्यादि पर विमर्श किया जाएगा। 

वस्तु एवं सेवा कर: पृष्ठभूमि

वस्तु एवं सेवा कर का स्वरुप

क्षतिपूर्ति उपकर

GST राजस्व में गिरावट के कारण

GST परिषद की भूमिका

GST परिषद का कार्य निम्नलिखित विषयों पर केंद्र और राज्यों की सिफारिश करना है-

संबंधित चुनौतियाँ

संभावित समाधान

आगे की राह

प्रश्न- आप कहाँ तक सहमत हैं कि GST अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम है? GST राजस्व में कमी केंद्र-राज्य संबंधों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?