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सतत् विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण | 21 Aug 2021 | सामाजिक न्याय

यह एडिटोरियल दिनांक 19/08/2021 को ‘हिंदू बिजनेस लाइन’ में प्रकाशित ‘‘Localising SDGs will pay’’ लेख पर आधारित है। इसमें सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये ऊर्ध्वगामी दृष्टिकोण और महिला संघों की संलग्नता के बारे में चर्चा की गई है।

सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals- SDGs) एक वैश्विक प्रयास है जिसका एक प्रमुख उद्देश्य है—सभी के लिये एक बेहतर भविष्य की प्राप्ति। इन वैश्विक और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये स्थानीयकरण (localization) एक महत्त्वपूर्ण साधन है। 

यह सहसंबंधित करता है कि किस प्रकार स्थानीय और राज्य सरकारें ऊर्ध्वगामी कार्रवाई (bottom-up action) के माध्यम से SDGs की प्राप्ति में सहायता दे सकती हैं और SDGs किस प्रकार स्थानीय नीति के लिये एक ढाँचा प्रदान कर सकते हैं।

यदि भारत को वर्ष 2030 तक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना है, तो उसे SDGs को प्रभावी ढंग से स्थानीयकृत करने के लिये एक तंत्र का निर्माण करना होगा—एक ऐसा तंत्र जो पंचायती राज प्रणाली के स्थानीय स्वशासन के साथ महिला संघों (women’s collectives) में मौजूद सामाजिक पूँजी का लाभ उठाता है और उन्हें एकीकृत करता है।

महिला संघ

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महिला संघ का महत्त्व

चुनौतियाँ

आगे की राह

निष्कर्ष

ग्रामीण स्तर पर सतत् विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण न केवल मौजूदा असमान संबंधों को चुनौती देगा, बल्कि एक ऐसा संस्थागत ढाँचा भी प्रदान करेगा जो राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।

इस दिशा में अभी अधिक विचार नहीं किया गया है कि कोई निर्धन परिवार तेज़ी से आगे बढ़ने के लिये तंत्र या संस्थानों का किस प्रकार लाभ उठा सकता है। इन छोटे संघों/समूहों को अधिक साझेदारीपूर्ण विकास के मूल के रूप में देखने की आवश्यकता है।

अभ्यास प्रश्न: महिला संघों और पंचायती राज व्यवस्था का लाभ उठाना सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति का एक प्रभावी उपाय है। चर्चा कीजिये।