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राज्यों में विधानपरिषदें | 30 Aug 2019 | भारतीय राजनीति

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस आलेख में राज्य में विधानपरिषद तथा उसके विभिन्न पक्षों की चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

मध्य प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह विधानपरिषद के निर्माण की दिशा में कदम उठाने की योजना बना रही है। ध्यातव्य है कि वर्ष 1956 में 7वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा मध्य प्रदेश के लिये विधानपरिषद की स्थापना का प्रावधान किया गया था किंतु अभी तक राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी न किये जाने के कारण मध्य प्रदेश में विधानपरिषद का गठन नहीं हो सका है। भारत के सभी राज्यों में दो सदन अस्तित्व में नहीं हैं। ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान में सिर्फ 6 राज्यों में ही विधानपरिषद की व्यवस्था है।

विधानपरिषद का गठन एवं विघटन

दूसरा सदन क्यों?

विधानपरिषद के सदस्य

विधानपरिषद का चुनाव

विधानसभा की तुलना में विधानपरिषद

राज्यसभा की तुलना में विधानपरिषद

विधानपरिषद की आलोचना

विधानसभा की तुलना में विधानपरिषद की स्थिति काफी कमज़ोर है। विधानपरिषद की शक्तिविहीन और प्रभावहीन भूमिका के कारण विशेषज्ञों द्वारा इस सदन की आलोचना की जाती रही है। आलोचक इसको द्वितीयक चैंबर, सफेद हाथी, खर्चीला सदन आदि की संज्ञा देते हैं। परिषद को ऐसे लोगों की शरणस्थली के रूप में देखा जाता है जो विधानसभा के समान निर्वाचन द्वारा चुनकर नहीं आ सकते। यह ऐसे व्यक्तियों की जिनकी सार्वजनिक स्थिति कमज़ोर होती है, लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं होते हैं तथा जनता द्वारा नकार दिये गए लोगों को सरकार में शामिल करने अर्थात् मुख्यमंत्री या मंत्री बनाने हेतु इस सदन का उपयोग किया जाता है।

विधानपरिषद की उपयोगिता

यह तथ्य सही है की विधानसभा को परिषद कि तुलना में अधिक अधिकार प्राप्त हैं फिर भी कुछ मामलों में इसकी उपयोगिता है, जोकि निम्नलिखित है-

विधानपरिषद वाले राज्य

निष्कर्ष

भारत में केंद्र के स्तर पर द्वि-सदनात्मक व्यवस्था की गई है। किंतु राज्य के स्तर पर एक सदन के दर्शन को अपनाया गया है। भारत में राज्यों के भौगोलिक आकार तथा जनसंख्या को लेकर अत्यधिक विविधता विद्यमान है। इसको ध्यान में रखकर राज्य के संदर्भ में दो सदनों की वैकल्पिक व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे 6 बड़े राज्यों में ही द्वि-सदनात्मक व्यवस्था मौजूद है। हाल में मध्य प्रदेश ने विधानपरिषद के गठन की इच्छा व्यक्त की है। उपरोक्त अध्ययन से यह बात स्पष्ट होती है कि राज्य में परिषद की भूमिका सीमित है। ऐसे में वे राज्य जिनकी आबादी अधिक है तथा जहाँ ऐसे समूह उपस्थित है और जिनको विधानसभा के माध्यम से उचित प्रतिनिधित्त्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है, में परिषद अच्छी भूमिका निभा सकती है। ध्यातव्य है कि परिषद की उपयोगिता सीमित है तथा यह अधिक खर्चीली व्यवस्था भी है, इसलिये ऐसे राज्यों को ही परिषद के गठन पर विचार करना चाहिये जो इसके अतिरिक्त भार को वहन करने की क्षमता रखते हों।

प्रश्न: वर्तमान में भारत के केवल 6 राज्यों में ही विधानपरिषद मौजूद है। क्या विधानपरिषद सिर्फ एक विलंबनकारी निकाय है? चर्चा कीजिये।