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बौद्धिक संपदा अधिकार: एक नज़र में | 11 May 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में बौद्धिक संपदा अधिकार व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

मनुष्य अपनी बुद्धि से कई तरह के आविष्कार और नई रचनाओं को जन्म देता है। उन विशेष आविष्कारों पर उसका पूरा अधिकार भी है लेकिन उसके इस अधिकार का संरक्षण हमेशा से चिंता का विषय भी रहा है। यहीं से बौद्धिक संपदा और बौद्धिक संपदा अधिकारों की बहस प्रारंभ होती है। यदि हम मौलिक रूप से कोई रचना करते हैं और इस रचना का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा गैर कानूनी तरीके से अपने लाभ के लिये प्रयोग किया जाता है तो यह रचनाकार के अधिकारों का स्पष्ट हनन है। 

जब दुनिया में बहस तेज हुई कि कैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा की जाए तब संयुक्त राष्ट्र के एक अभिकरण विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization-WIPO) की स्थापना की गई। इस संगठन के प्रयासों से ही बौद्धिक संपदा अधिकार के महत्त्व को प्रमुखता प्राप्त हुई। 

इस आलेख में बौद्धिक संपदा अधिकार, उसके प्रकार, बौद्धिक संपदा के संदर्भ में भारत का नज़रिया और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन पर विमर्श करने का प्रयास किया जाएगा। 

क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार?

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन

बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रकार

भारतीय बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था की खामियाँ 

बौद्धिक संपदा के संरक्षण हेतु किये गए सरकार के प्रयास 

बौद्धिक संपदा के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय 

बौद्धिक अधिकार के संरक्षण में भारत की स्थिति

आगे की राह 

प्रश्न- बौद्धिक संपदा अधिकार से आप क्या समझते हैं? इसके विभिन्न प्रकारों का उल्लेख करते हुए बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिये। इन चुनौतियों के समाधान में किये जाने वाले प्रयासों की चर्चा भी कीजिये।