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भारत के लिये दो मोर्चों पर युद्ध की चुनौती | 30 Dec 2020 | अंतर्राष्ट्रीय संबंध

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में भारत के लिये चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर युद्ध की संभावनाओं व इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

पिछली शताब्दी में सुरक्षा की दृष्टि से भारत की रणनीतिक सोच पाकिस्तान और उसके कारण उत्पन्न वाली सुरक्षा चुनौतियों पर ही केंद्रित रही है। परंतु हाल के दशकों में भारत के सैन्य  विशेषज्ञों का मत इस दृष्टिकोण को लेकर दृढ़ हुआ है कि भारत के लिये चीन-पाकिस्तान का साझा सैन्य खतरा एक वास्तविक संभावना हो सकता है। 

मई 2020 में लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ और इससे जुड़ी वार्ताओं के गतिरोध ने चीनी सैन्य खतरे को अधिक स्पष्ट और वास्तविक बना दिया है। हालाँकि कुछ मीडिया खबरों के अनुसार, पाकिस्तान ने हाल में गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में 20,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करते हुए इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति को लद्दाख में चीनी सैन्य तैनाती के बराबर कर लिया है।

इसे देखते हुए दो मोर्चों (LOC और LAC के संदर्भ में) पर  खतरे के लिये तैयार रहना भारत का एक समझदारी भरा निर्णय माना जाएगा।      

चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य साझेदारी:  

भारत और दो मोर्चों पर युद्ध से जुड़ी चुनौतियाँ:

आगे की राह: 

निष्कर्ष:   

अपनी सैन्य आक्रामकता के साथ एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरता हुआ चीन वर्तमान में भारत के लिये एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है और साथ ही पाकिस्तान भी क्षेत्र में भारत के प्रभुत्व को सीमित करने की चीनी रणनीति का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट है कि चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर युद्ध के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता, ऐसे में भारत को इस संभावित चुनौती से निपटने के लिये अपने सिद्धांतों और सैन्य क्षमता दोनों के विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न:  चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर युद्ध की संभावनाओं को देखते हुए भारत को  इस संभावित चुनौती से निपटने हेतु अपने सिद्धांतों और सैन्य क्षमता दोनों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। चर्चा कीजिये।