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असम समस्या, 35 साल पुराना असम समझौता और इसकी धारा-6 | 04 Jan 2019 | आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ


केंद्र सरकार ने असम समझौते की धारा 6 को लागू करने के लिये एक उच्‍चस्‍तरीय समिति का गठन करने के साथ ही समझौते के कुछ निर्णयों व बोडो समुदाय से जुड़े कुछ मामलों हेतु उपायों को मंज़ूरी दी। यह निर्णय सरकार ने इस तथ्य के मद्देनज़र लिया है कि असम समझौते के 35 वर्षों बाद भी इसकी धारा-6 पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है।

क्यों हुआ था असम समझौता?

क्या है असम समझौता?

NRC का मुद्दा


नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस या नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है NRC, जिसे सभी भारतीय नागरिकों का विवरण शामिल करने के लिये बनाया गया है। लेकिन मज़े की बात यह है कि देशभर में केवल असम में ही NRC बनाया गया है। इसे अपडेट करने के नियम तथा प्रावधान नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 में दिये गए हैं। NRC को अपडेट करने का काम असम सरकार और भारत सरकार मिलकर कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 2005 में 1951 के इस NRC को अपडेट करने का फैसला किया गया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। एक अनुमान के अनुसार, असम में मुसलमानों की आबादी 34 फीसदी से ज़्यादा है और इनमें से 85 फीसदी ऐसे हैं जो बाहर से आकर बसे हैं। इनमें ज़्यादातर बांग्लादेशी हैं, जो अलग-अलग समय में आते रहे और राज्य के विभिन हिस्सों में बसते रहे। बाद में इस मुद्दे को लेकर मामले विभिन्न अदालतों तक गए और 2015 में सभी मामलों को इकट्ठा कर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में लाया गया। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम में NRC को अपडेट करने का काम किया जा रहा है।

क्या करेगी उच्चस्तरीय समिति?


सरकार ने पिछले तीन दशक से भी अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़े असम समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपाय सुझाने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। सरकार ने बोड़ो समुदाय से संबंधित लंबित मुद्दों के समाधान के लिये भी कई कदम उठाने का फैसला किया है।

क्या है बोडोलैंड का मुद्दा?

सरकार ने दी हालिया मंज़ूरी

बोडोलैंड टेरीटोरियल ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट के चार जिलों- कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदालगुड़ी में लगभग 30 फीसदी आबादी बोडो जनजाति की है।

असम समझौते की धारा-6


असम समझौते की धारा-6 में असमियों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई पहचान और धरोहर के संरक्षण और उसे बढावा देने के लिये उचित संवैधानिक, विधायी तथा प्रशासनिक उपाय करने का प्रावधान है। समिति इन प्रावधानों को लागू करने के लिये 1985 से अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

राज्य में असमिया बनाम बाहरी का मुद्दा कोई नया नहीं है, बल्कि देश की आज़ादी के बाद से यह वहाँ के ज्वलंत मुद्दों में सबसे ऊपर रहा है। वर्तमान में चर्चा में रहने वाला NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस इसी मुद्दे की देन है। असमिया बनाम बाहरी का मुद्दा तब भी इतना प्रबल था कि देश में असम ही एकमात्र राज्य था जहाँ 1951 की जनगणना के बाद NRC बनाया गया था।