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आर्थिक असमानता की चौड़ी होती खाई | 28 Dec 2017 | सामाजिक न्याय

संदर्भ

इस लेख में हम विश्व असमानता रिपोर्ट के अलावा आय असमानता के कारणों एवं समाधान पर भी चर्चा करेंगे।

क्या है विश्व असमानता रिपोर्ट?

विश्व असमानता रिपोर्ट में निहित प्रवृत्तियाँ

भारत के संदर्भ में क्या कहती है यह रिपोर्ट?

असमानता के प्रभाव?
असमानता को आय तथा अवसरों के असमान वितरण के रूप में परिभाषित किया गया है। यह एक देश में गरीबी और लोगों में निराशा की वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है।

क्या हैं इस असमानता के कारण?

  1. एलपीजी सुधारों ने मुख्य रूप से उनकी आय में वृद्धि की है जो पहले से ही समृद्ध थे।
  2. बढ़ते निजीकरण के कारण सरकार द्वारा तय मापदंडों के अनुसार लोगों को पारिश्रमिक नहीं मिला है।
  3. कृषि सुधार और भूमि सुधार को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
  4. धन का पुनर्वितरण (wealth redistribution) संभव नहीं हो पाया है।
  5. महिलाओं को प्रायः किसान नहीं माना जाता और न ही उनके पास कोई भूमि है, इसलिये किसानों के लिये चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।
  6. भारत में पुस्तैनी अरबपतियों की संख्या अधिक है और ऐसे में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक धन का हस्तातंरण एवं संचयन होता रहता है।
  7. रोज़गार में कमी का भी आय असमानता पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
  8. राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखने की जुगत में प्रायः सरकारें सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की अनदेखी करती हैं।

कैसे किया जाता है आय असमानता का आकलन?

⇒ लोरेंज़ वक्र कुल आय व आय प्राप्तकर्त्ताओं के मध्य व्याप्त विषमता को दर्शाता है। इस वक्र के अनुसार यह ज्ञात किया जाता है कि देश की आधी या इससे अधिक आबादी की कुल आय में कितनी भागीदारी है।
⇒ लोरेंज़ वक्र देश के 5% या 10% धनाढ़य लोगों की कुल आय में हिस्सेदारी का भी आकलन करता है।
⇒ लोरेंज़ वक्र समानता रेखा से जितना दूर होगा, समाज में आय के वितरण में उतनी ही विषमता देखने को मिलेगी।
⇒ एक आदर्श स्थिति तब मानी जाती है जब समानता रेखा और लोरेंज़ वक्र के बीच कोई दूरी नहीं रह जाती।
⇒ आदर्श परिस्थितियों में देश की सबसे गरीब 25 प्रतिशत जनता का भी देश की कुल आय में 25 हिस्सा होता है। (उदाहरण के तौर पर 25 प्रतिशत लिया गया है, यह आँकड़ा कुछ भी हो सकता है)

आगे की राह

निष्कर्ष