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'सु-शहरीकरण’: महत्त्व और चुनौतियाँ | 21 Sep 2021 | भारतीय समाज

यह एडिटोरियल 20/09/2021 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित ‘‘Why India needs 'good' urbanisation’’ लेख पर आधारित है। इसमें शहरीकरण से संबद्ध समस्याओं की चर्चा की गई है और विचार किया गया है कि 'सु'-शहरीकरण (‘Good’ Urbanisation) किस प्रकार इन समस्याओं को हल कर सकता है।

संदर्भ 

शहरों को प्रायः गरीबी उन्मूलन की एक तकनीक के रूप में देखा जाता है; आँकड़ों की मानें तो न्यूयॉर्क शहर की समग्र जीडीपी रूस की जीडीपी के समान है, जबकि न्यूयॉर्क में रूस की तुलना में केवल 6% आबादी और 0.00005% भूमि ही मौजूद है। 

हालाँकि कोविड-19 महामारी ने ग्रामीण इलाकों की उस धारणा को प्रोत्साहन दिया है, जिसमें माना जाता है कि एक तकनीक के रूप में शहर, प्रवासियों के प्रति उनकी शत्रुता, रोग संक्रमण हॉटस्पॉट प्रवृत्ति और डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप कार्य की घटती हुई केंद्रीयता के कारण अवांछनीय हैं।

किंतु, कोविड-19 को हमारे शहरों को अधिक शक्ति और धन के साथ सशक्त बनाकर ’सु-शहरीकरण’ (Good Urbanization) को उत्प्रेरित करने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।   

डिबेट: द विज़ार्ड vs प्रोफेट

शहरीकरण: एक समाधान या समस्या

भारत में शहरीकरण की प्रमुख समस्या: कमज़ोर स्थानीय शहरी निकाय

आगे की राह- सु-शहरीकरण की आवश्यकता

Urban-Population

अभ्यास प्रश्न: ‘कोविड-19 महामारी इस बात को पुष्ट करती है कि निर्धनता कम करने हेतु सु-शहरीकरण हमारे सबसे शक्तिशाली उपायों में से एक है। टिप्पणी कीजिये।