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पर्यावरण और विकास | 11 Oct 2019 | जैव विविधता और पर्यावरण

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में आरे जंगलों के संबंध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और उनसे संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

मुंबई स्थित आरे मिल्क कॉलोनी में हज़ारों पेड़ों की कटाई ने देश में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर एक नई बहस को जन्म दिया है, देश की आर्थिक राजधानी में आरे बचाओ आंदोलन के तहत हज़ारों लोग लामबंद हो गए हैं और सड़कों पर आकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न अनिवार्य हो जाता है कि क्या हम पर्यावरण की अनदेखी करते हुए विकास के नए आयाम प्राप्त कर सकते हैं? उल्लेखनीय है कि आरे जंगलों के कारण ही मुंबई दुनिया के उन अनोखे महानगरों में शामिल है जिनमें कंक्रीट के जंगलों के साथ-साथ एक असली जंगल भी मौजूद है।

क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?

मेट्रो का नहीं हो रहा है विरोध

पर्यावरण कार्यकर्त्ताओं और आरे बचाओ आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि वे राज्य में मेट्रो का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे तो इतनी अधिक संख्या में पेड़ों के काटे जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरे के जंगलों में स्टेशन बनाने का निर्णय हास्यास्पद है, क्योंकि इन जंगलों के आस-पास रहने वाले लोगों की संख्या काफी कम है और जो रहते भी हैं उनका इससे दूर-दूर तक कुछ लेना-देना नहीं है।

आरे जंगलों का इतिहास

क्यों ज़रूरी है आरे

जंगल नहीं है आरे

आरे के इतिहास पर नज़र डालें तो पता चलता है कि इसकी स्थापना मुख्यतः व्यावसायिक गतिविधियों हेतु की गई थी, परंतु समय के साथ यहाँ इतने अधिक पेड़ लगाए गए कि यह एक जंगल जैसा लगने लगा। वर्तमान समय में यहाँ 4 लाख से अधिक पेड़, एक सक्रिय पारिस्थितिकी तंत्र, दुर्लभ पक्षी एवं जानवर, झीलें, खेत हैं और साथ ही कुछ आदिवासी समुदायों के लोग रहते हैं। ध्यातव्य है कि ये सभी विशेषताएँ किसी भी एक सामान्य जंगल में देखी जा सकती हैं। वर्ष 2015 में वनशक्ति नाम के एक NGO ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर आग्रह किया कि आरे को "जंगल" घोषित किया जाए, परंतु यह याचिका सितंबर 2018 में खारिज कर दी गई। इसके अलावा कोर्ट में इस संदर्भ में दायर की गई कई अन्य याचिकाओं की सुनवाई अभी शेष है।

पर्यावरण पर प्रभाव

मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का पक्ष

निष्कर्ष

यह सत्य है कि मज़बूत आधारिक संरचना के अभाव में किसी भी समाज के लिये विकास करना अपेक्षाकृत काफी मुश्किल होता है, परंतु इस तथ्य का पालन करते हुए पर्यावरण को पूर्णतः नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अतः यह आवश्यक है कि यदि कभी देश के विकास और पर्यावरण के मध्य द्वंद्व उत्पन्न हो तो विवेक के साथ इस विषय पर विचार किया जाए और ऐसे वैकल्पिक रास्तों की तलाश की जाए जो पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हमें विकास की नई दिशा दिखाएँ।

प्रश्न: आरे जंगल का उदाहरण देते हुए समाज में विकास और पर्यावरण के मध्य द्वंद्व को स्पष्ट कीजिये।