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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (A.I) के माध्यम से डिजिटल शासन | 14 Aug 2021 | शासन व्यवस्था

यह एडिटोरियल दिनांक 12/08/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित ‘‘Digital governance through AI’’ लेख पर आधारित है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की क्षमताओं और भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारितंत्र (AI ecosystem) के विकास के लिये आवश्यक उपायों की चर्चा की गई है।

प्रत्येक नागरिक के लिये एक डिजिटल पहचान सृजित करने के लिये जैम ट्रिनिटी (जन धन – आधार – मोबाइल) पर सरकार के फोकस के साथ हाल के वर्षों में पूरे देश में डिजिटल अंगीकरण का प्रसार हुआ है। 

वर्ष 2007 में महज 4% की इंटरनेट पहुँच से आगे बढ़ते हुए वर्तमान में भारत लगभग 55% आबादी को इंटरनेट पहुँच के दायरे में लेता है और वर्ष 2025 तक एक बिलियन उपयोगकर्ताओं तक इसकी पहुँच होने की उम्मीद है।

डिजिटल अंतराल को सफलतापूर्वक कम करने के बाद भारत के पास अब फ्रंटियर प्रौद्योगिकियों को अपनाने के माध्यम से नागरिकों को लाभान्वित करने के लिये सृजित डेटा का उपयोग करने का एक असाधारण अवसर मौजूद है।  

चूँकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सर्वव्यापी होता जा रहा है, भारत के पास क्षमता है कि वह इस विशाल डेटाबेस का लाभ उठाते हुए उस ढाँचे का निर्माण करे जो लोगों के सशक्तीकरण, समान हिस्सेदारी के सृजन और वर्ष 2025 तक डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आर्थिक मूल्य के लक्ष्य की ओर दौड़ लगाने में सहायता करेगा।  

भारत में AI से संबद्ध संभावनाएँ

AI के व्यापक उपयोग से संबद्ध चुनौतियाँ

आगे की राह 

निष्कर्ष

विभिन्न हितधारकों को आपसी सहयोग करना चाहिये ताकि सुनिश्चित हो सके कि AI का उपयोग परोपकारी उद्देश्यों के लिये किया जाएगा।

अपने प्रौद्योगिकीय कौशल और डेटा की प्रचुरता के माध्यम से भारत AI समाधानों के माध्यम से विकास का रास्ता दिखा सकता है और इस क्रम में समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तीकरण में योगदान कर सकता है।

अभ्यास प्रश्न: भारत के पास क्षमता है कि वह लोगों के सशक्तीकरण, समान अवसरों के निर्माण और आर्थिक विकास के लिये अवसंरचनाओं के निर्माण हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी का लाभ उठाये। चर्चा कीजिये।