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ओडिशा राज्य विधानमंडल द्वारा विधानपरिषद के गठन संबंधी प्रस्ताव | 27 Aug 2018 | भारतीय राजनीति

संदर्भ 

यदि राज्यों को विधानपरिषदों के गठन से कोई वास्तविक लाभ होता है तो देश के सभी राज्यों को तर्कसंगत रूप से दूसरे सदन/उच्च सदन को अपना लेना चाहिये। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में केवल सात राज्यों में विधान परिषदें हैं और यह तथ्य इस ओर इशारा करता है कि देश में अभी इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सर्वसम्मति की अनुपस्थिति है। चर्चा का मुद्दा यह है कि अब ओडिशा राज्य भी उन राज्यों के समूह में शामिल होना चाहता है, जिनमें उच्च सदन है। इस संदर्भ में राज्य मंत्रिमंडल ने अन्य राज्यों में कार्यरत दूसरे सदन के कामकाज का अध्ययन करने और संबंधित सिफारिशें करने के लिये वर्ष 2015 में स्थापित समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए 49 सदस्यीय विधानपरिषद को मंज़ूरी भी दे दी है। अब प्रश्न यह है कि विधानपरिषद क्या है और इसके गठन हेतु कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है तथा क्या राज्य को विधानपरिषद से कोई वास्तिवक लाभ होता है अथवा नहीं?

विधानपरिषद

संवैधानिक प्रावधान 

विधानपरिषद के गठन की प्रक्रिया 

द्विसदनीय विधायिका का महत्त्व और कमियाँ 

आगे की राहः

वर्तमान समय की मांग है कि संसद की सदस्यता को निर्धारित करने वाले नियमों का पुनः अवलोकन हो। जय प्रकाश नारायण दलविहीन राज्यसभा के पक्ष में थे। धनबल के दुरुपयोग से निपटने और चुनावों में भ्रष्टाचार रोकने के लिये चुनाव प्राधिकारियों द्वारा  सख्त निगरानी की जानी रखना आवश्यक है। विधानपरिषद के सृजन, पुनरुद्धार और उत्सादन के विषय में विविध और असंगत चर्चाएँ निहित हैं। यह सब देखते हुए ओडिशा के प्रस्ताव से देश को बड़े पैमाने पर विधानपरिषदों के निर्माण पर राष्ट्रीय सहमति बनाने का अवसर मिल सकता है।