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नागरिकता संशोधन विधेयक और विवाद | 10 Dec 2019 | शासन व्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में हालिया नागरिकता संशोधन विधेयक और उसको लेकर हो रहे प्रदर्शनों से जुड़े सभी महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया गया। विदित हो कि नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जाएगा। इस विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव किया गया है। ध्यातव्य है कि इससे पूर्व वर्ष 2016 में भी केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया था, हालाँकि लोकसभा से पारित होने के बावजूद भारी विरोध प्रदर्शन के कारण सरकार ने इसे राज्यसभा में प्रस्तुत नहीं किया। वर्तमान विधेयक को लेकर भी देश के कई हिस्सों खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है और धार्मिक आधार पर देश की नागरिकता को परिभाषित करना भारतीय संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।

क्या कहता है नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019?

2016 के विधेयक और 2019 के विधेयक में प्रमुख अंतर

विधेयक से संबंधित विवाद

विधेयक को लेकर सरकार का पक्ष

असम समझौते का विवाद

धर्म आधारित परिभाषा- अनुच्छेद 14 का उल्लंघन?

NRC और नागरिकता संशोधन विधेयक

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

आगे की राह

प्रश्न: हालिया नागरिकता संशोधन विधेयक के आलोक में स्पष्ट कीजिये कि क्या धर्म के आधार पर नागरिकता का निर्धारण भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत की अवहेलना करता है?