बिग डाटा, बड़ा खतरा | 15 Jun 2017

संदर्भ
हाल ही में कुछ दिनों से देश में आधार से जुड़े व्यक्ति की गोपनीयता के अधिकार को लेकर काफी चर्चा चल रही है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। लेकिन इस डिजिटल दुनिया में बिग डाटा और सामाजिक साइटों (social sites) आदि के द्वारा भी व्यक्ति की गोपनीयता पर हमला किया जा रहा है उसका क्या? असल में बिग डाटा, ऑनलाइन डाटाओं का एक संग्रहण है, जिसका उपयोग निगमों द्वारा अपने उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझने के लिये किया जाता है। ये अपने उत्पादों एवं सेवाओं के द्वारा उपयोगकर्ताओं के बारे में डाटा एकत्र करते है। क्या ये सब भी व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन कर रहे है? 

बिग डाटा के लाभ 

  • सरकार की एक मुख्य समस्या है टैक्स चोरी को रोकना। अत: बिग डाटा इस चोरी की पहचान करने और सरकार की दक्षता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • बिग डाटा किसी व्यक्ति की आनुवंशिक प्रोफाइल मैप बनाने में मदद कर सकता है, इससे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को रोगी के स्वास्थ्य का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
  • 2009 में संयुक्त राष्ट्र ने ‘संयुक्त राष्ट्र वैश्विक पल्स’ को बिग डाटा उद्योग में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया था, ताकि यह संगठन मानव के संकट की स्थति में तीव्र और बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सके।
  • बिग डाटा की आँकड़ों की रिकॉर्डिंग करने की स्वचालित दक्षता के कारण रिकॉर्ड प्रबंधन करना आसान हो जाता है।
  • बिग डाटा की क्लाउड-आधारित तकनीक के कारण डाटा का बैकअप रखना आसान होता है और यह निरंतर बदलते डाटा के लिये रियल टाइम पहुँच को सुनिश्चित करता है।
  • विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा एकत्रित किये गए आँकड़ों के माध्यम से सरकार नागरिकों के बदलते व्यवहार को ट्रैक कर सकती है तथा इसका उपयोग नीति-निर्माण में किया जा सकता है। 

संभावित खतरें 

  • चूँकि डाटा का भंडारण विदेशों में अवस्थित कंपनियों द्वारा किया जाता है। अत: डाटा को विदेशों में इतनी बड़ी मात्रा में भंडारण करने के साथ एक समस्या यह है कि ऐसे डाटा रखने वाले लोगों के द्वारा लोगों की गोपनीयता का उल्लंघन किया जा सकता है। 
  • एक राष्ट्र की नीतियों को प्रभावित करने के लिये विदेशी सरकारों या दुष्ट (Rogue) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डाटा के इस विशाल भंडार का उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार का संग्रहण दुष्ट तत्वों या विरोधी विदेशी सरकारों के हाथों में हानिकारक साबित हो सकता है। उदाहरण के लिये अमेरिकी चुनाव में कथित रूप से रूसी हस्तक्षेप हमें बताता है कि उपर्युक्त संभावनाएँ केवल कल्पना मात्र नहीं हैं।
  • एक बड़ी समस्या यह है भी हो सकती है कि किसी राष्ट्र के आर्थिक धन को देश से कही और पहुँचाया जा सकता है।
  • वर्तमान में, विशाल मात्रा में आँकड़ों का संग्रहण करने वाले निगम ज़्यादातर यू.एस.ए. जैसे विकसित देशों में अवस्थित हैं। दूसरी तरफ भारत सहित अधिकांश उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के पास न तो इस प्रकार का ज्ञान है और न ही व्यवसायों के पास अनुकूल माहौल है, जिससे इस प्रकार के बड़े पैमाने पर डाटा का भंडारण कर सके। अत: इन देशों के लिये यह स्थिति हानिकारक हो सकती है। 

भारत क्या कर सकता है 

  • बिग डाटा प्रौद्योगिकी (BDT) का उपयोग करने वाली कंपनियों के लिए भारत को एक अत्याधुनिक सुपर-बिग डेटा केंद्र बनाना चाहिये।
  • हमें बिग डाटा प्रौद्योगिकी से संबंधित कंपनियों को सब्सिडी प्रदान करनी चाहिये जैसे सस्ती बिजली, अचल संपत्ति और सस्ता नेटवर्क बैंडविड्थ इत्यादि।
  • अल्पावधि के लिये हमें एक नीतिगत ढाँचा भी तैयार करना चाहिये जो हमारी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमाओं के भीतर एकत्रित किये गए डाटा को बनाए रखने के लिए विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे गूगल और अमेज़न को भारत में अपने बड़े डाटा केंद्रों के निर्माण को प्रोत्साहित करे।
  • हमें हमारे शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को बिग डाटा साइंस और डाटा सेंटर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिये।
  • उल्लेखनीय है कि चीन ने इस खतरे को स्पष्ट रूप से समझाते हुये गतिशील और सावधानीपूर्वक कदम उठाएं हैं। उदाहरणस्वरुप चीन ने बड़ी इंटरनेट कंपनियों जैसे बीडु (Baidu) और अलीबाबा के गठन को प्रोत्साहन दिया है। 

आगे की राहें 

  • हमें लोगों की गोपनीयता की रक्षा के लिए सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षण की तथा संगठनों और सरकारी अधिकारियों के लिये कठोर फायरवॉल, डेटा बैकअप की आवश्यकता होगी।
  • सरकार को नागरिकों के व्यक्तिगत डाटा को समुचित सुरक्षा प्रदान करने के लिये एक नया ‘डाटा संरक्षण कानून’ बनाना चाहिये।
  • सरकार को सार्वजनिक डाटा के प्रभावी ढंग से उपयोग करने और उसे सुरक्षा प्रदान करने के लिये भी एक सक्षम ढाँचा तैयार करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष
यह सुनिश्चित हो चुका है कि बिग डाटा के अपने फायदे और नुकसान हैं। देश की अर्थव्यवस्था ज़्यादा डिजिटल होती जा रही है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि बिग डाटा अर्थव्यवस्था के लिये काफी लाभदायक हो सकता है। हमें ज़रूरत इस बात की है कि हम लोगों के निजता के अधिकार को सुरक्षा प्रदान करते हुये बिग डाटा से लाभ उठाएं। अत: जब तक हम बिग डाटा के दुष्प्रभावों का सामना करने के लिये उपयुक्त नीतियाँ तैयार नहीं कर लेते, तब तक देश पर अप्रत्याशित ई-औपनिवेशीकरण का खतरा बना रहेगा।