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बैंकिंग संकट: कारण और समाधान | 07 Mar 2020 | विविध

संदर्भ

किसी भी देश के आर्थिक विकास का मुख्य आधार उस देश का बुनियादी ढाँचा होता है। यदि बुनियादी ढाँचा ही कमज़ोर हो तो कितना भी प्रयास किया जाए व्यवस्था को मज़बूत नहीं बनाया जा सकता है। यही कारण है कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में विकास एवं उन्नति हेतु किये जाने वाले प्रयासों को बल प्रदान करने के लिये नीति निर्माताओं द्वारा एक ऐसे मार्ग का अनुसरण किया जाता है जिसके माध्यम से सरकार आम आदमी को अर्थव्यवस्था के औपचारिक माध्‍यम में शामिल कर सके।

यह औपचारिक माध्यम है ‘बैंक’। बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। देश में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में बैंक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परंतु उस समय क्या स्थिति होगी जब बैंकिंग तंत्र ही संकट के दौर से गुजरने लगे। वर्तमान में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। देश में निज़ी क्षेत्र का चौथा सबसे बड़ा बैंक ‘यस बैंक (YES BANK)’ संकट के इसी दौर से गुज़र रहा है। बैंक ने प्रति खाताधारक 50000 रुपए प्रतिमाह निकासी की सीमा आरोपित कर दी है। ऐसे में खाताधारकों के सामने मुद्रा का संकट गहरा गया है। इस आलेख में बैंकों की खस्ता हालत के कारणों, उसके प्रभाव तथा सरकार व भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जाएगी।

पृष्ठभूमि

बैंकिंग संकट का कारण

गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ

प्रभाव

समाधान

निष्कर्ष- भारत की बैंकिंग प्रणाली ऐसी चुनौती भरी पृष्ठभूमि में अपेक्षाकृत लंबे समय से कार्य कर रही है जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आस्ति गुणवत्ता, पूंजी पर्याप्तता तथा लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके मद्देनज़र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वैश्विक जोखिम मानदंडों के अनुरूप उनकी पूंजी ज़रूरतों को पूरा करने और क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिये पूंजी लगा रही है। लेकिन एनपीए का स्तर 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाने के कारण चिंता होना स्वाभाविक है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि किसी काम की नहीं है। यदि इस राशि की वसूली हो जाती है तो सरकारी बैंकों की लाभप्रदता में इज़ाफा, लाखों लोगों को रोज़गार, नीतिगत दर में कटौती का लाभ कारोबारियों तक पहुँचना, आधारभूत संरचना का निर्माण, कृषि की बेहतरी, अर्थव्यवस्था को मज़बूती, विकास को गति देना आदि संभव हो सकेगा।

प्रश्न- भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के संकट पर चर्चा करें। इस समस्या के समाधान के लिये किये जा रहे प्रयासों का उल्लेख करें।