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राष्ट्रीय शिक्षा नीति: महत्त्व व चुनौतियाँ | 31 Jul 2020 | शासन व्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में राष्ट्रीय शिक्षा नीति व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति: महत्त्व व चुनौतियाँ

(An education policy that is sweeping in its vision)

संदर्भ

पढ़ों, लिखा है दीवारों पर मेहनतकश का नारा

पढ़ों, पोस्टर क्या कहता है, वो भी दोस्त तुम्हारा

पढ़ों, अगर अंध विश्वासों से पाना है छुटकारा

पढ़ों, किताबें कहती हैं सारा संसार तुम्हारा

सफदर हाशमी का यह मशहूर गीत न केवल जीवन में शिक्षा की आवश्यकता बल्कि उसके महत्त्व को भी रेखांकित करता है। जीवन में शिक्षा के महत्त्व को देखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्तमान सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलावों के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। करीब तीन दशक के बाद देश में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है। इससे पूर्व वर्ष 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी और वर्ष 1992 में इसमें संशोधन किया गया था। उम्मीद की जा रही है कि यह शिक्षा नीति शिक्षा क्षेत्र में नवीन और सर्वांगीण परिवर्तनों की आधारशिला रखेगी। विदित है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को तैयार करने के लिये विश्व की सबसे बड़ी परामर्श प्रक्रिया आयोजित की गयी थी। जिसमें देश के विभिन्न वर्गों से रचनात्मक सुझाव माँगे गए थे।

प्राप्त सुझावों और विभिन्न शिक्षाविदों के अनुभव तथा के. कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों के आधार पर शिक्षा तक सबकी आसान पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत स्तंभों पर निर्मित यह नई शिक्षा नीति सतत विकास के लिये ‘एजेंडा 2030’ के अनुकूल है और इसका उद्देश्य 21वीं शताब्दी की आवश्यकताओं के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला बनाते हुए भारत को एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज और वैश्विक महाशक्ति में बदलकर प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।

भारतीय शिक्षा की विकास विकास यात्रा

शिक्षा नीति में परिवर्तन की आवश्यकता क्यों?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा की पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर देश की जीडीपी के 6% हिस्से के बराबर निवेश का लक्ष्य रखा गया है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत ही ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ (Ministry of Human Resource Development- MHRD) का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ (Education Ministry) करने को भी मंज़ूरी दी गई है।

प्रमुख बिंदु

प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित प्रावधान

भाषायी विविधता को संरक्षण

पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधी सुधार

शिक्षण व्यवस्था से संबंधित सुधार

उच्च शिक्षा से संबंधित प्रावधान

भारत उच्च शिक्षा आयोग

संबंधित चुनौतियाँ

प्रश्न- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत स्तंभों पर आधारित है। कथन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये।