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अखिल भारतीय न्यायिक सेवा | 07 Jul 2021 | भारतीय राजनीति

यह एडिटोरियल दिनांक 06/07/2021 को द हिंदू में प्रकाशित लेख “Will a national judiciary work?” पर आधारित है। यह अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना के पक्ष और विपक्ष में तर्कों की बात करता है।

भारत सरकार ने हाल ही में एक प्रवेश परीक्षा के माध्यम से अधीनस्थ न्यायालयों हेतु अधिकारियों की भर्ती के लिये अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) स्थापित करने हेतु एक विधेयक पारित करने का प्रस्ताव दिया है।

स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा की तर्ज पर एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) का प्रावधान किया गया था।

वर्तमान में AIJS का विचार न्यायिक सुधारों की पृष्ठभूमि में प्रस्तावित किया जा रहा है, जो कि विशेष रूप से न्यायपालिका में रिक्त पदों और लंबित मामलों की जाँच से संबंधित है। AIJS की स्थापना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे कई संवैधानिक और कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

AIJS के लिये संवैधानिक परिप्रेक्ष्य

AIJS के लाभ:

संबंधित चुनौतियाँ:

नोट:

निष्कर्ष:

लंबित मामलों की दुर्गम संख्या एक भर्ती प्रणाली की स्थापना की मांग करती है जो मामलों के त्वरित निपटान के लिये बड़ी संख्या में कुशल न्यायाधीशों की भर्ती करे। हालाँकि AIJS के विधायी ढाँचे में आने से पहले सर्वसम्मति बनाने और AIJS की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न: अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना एक सकारात्मक कदम है लेकिन कई संवैधानिक और कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। चर्चा कीजिये।