शासन व्यवस्था
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारत के शासन का भविष्य
- 04 May 2026
- 196 min read
यह एडिटोरियल 29/04/2026 को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित “AI is changing national security bureaucracy. Without empathy, nuance, that is a dangerous turn” शीर्षक वाले लेख पर आधारित है। यह संपादकीय भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं कूटनीति में AI की द्वैध प्रकृति का विश्लेषण करता है और राज्य की क्षमता को बढ़ाने वाले एक कारक के रूप में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालता है। यह एक संप्रभु, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की अनुशंसा करता है ताकि भारत जिम्मेदार और समावेशी AI शासन पर वैश्विक चर्चा का नेतृत्व कर सके।
प्रिलिम्स के लिये: इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026, भाषिनी, पैक्स सिलिका, IndiaAI मिशन, प्रोजेक्ट उद्भव
मेन्स के लिये: पारंपरिक कूटनीति को बदलने में AI की भूमिका, आवश्यक मुद्दे और उपाय
विवियन बालकृष्णन द्वारा रेखांकित प्रवृत्तियों के अनुरूप शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र एकीकरण विश्वभर में राज्य क्षमता को पुनर्परिभाषित कर रहा है। भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता हेतु राष्ट्रीय रणनीति का अनुमान है कि वर्ष 2025 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 500 अरब डॉलर की वृद्धि कर सकती है, जो इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है। इंडिया स्टैक और डिजिलॉकर जैसे सरकारी मंच पहले से ही प्रतिवर्ष अरबों लेन-देन संसाधित कर रहे हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता-तैयार डिजिटल शासन अवसंरचना को प्रदर्शित करते हैं। हालाँकि जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति-निर्माण और निर्णय-प्रक्रिया को प्रभावित करने लगी है, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, उत्तरदायित्व और नैतिक शासन से जुड़ी चिंताएँ गंभीर चुनौतियों के रूप में उभर रही हैं।
शासन व्यवस्था में परिवर्तन के लिये भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस प्रकार कर रहा है?
- सामरिक स्वायत्तता के लिये संप्रभु AI अवसंरचना: तकनीकी उपनिवेशीकरण को रोकने के लिये भारत एक संप्रभु ‘AI स्टैक’ का निर्माण कर रहा है, जिससे उसके सैन्य क्लाउड और राजनयिक डेटा विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा अवरोधन से सुरक्षित रह सकें।
- घरेलू कंप्यूटिंग अवसंरचना (जैसे: सर्वम AI का 'सॉवरेन AI' स्टैक) पर नियंत्रण को अब भू-राजनीतिक प्रभाव के एक गैर-परक्राम्य स्तंभ के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- भारत AI मिशन के तहत, मौजूदा 38,000 से अधिक उच्च-स्तरीय GPU को ₹65 प्रति घंटे की दर से उपलब्ध कराया गया है, जिससे स्टार्टअप, शोधकर्त्ताओं, छात्रों एवं सार्वजनिक संस्थानों के लिये कंप्यूटर तक पहुँच आसान हो गई है। मूल रूप से, यह एक सशक्त विश्वास को दर्शाता है।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के AIRAWAT इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा समर्थित, यह स्थानीय AI अनुसंधान को सब्सिडी देता है और रणनीतिक डेटा की सुवाह्यता सुनिश्चित करता है।
- भाषिनी के माध्यम से भाषाई लोकतंत्रीकरण: भारतीय सरकार भाषिनी AI पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाकर उस 'भाषाई बाधा' को दूर करने का प्रयास कर रही है, जिसने ऐतिहासिक रूप से गैर-अंग्रेज़ी भाषी लोगों को डिजिटल शासन से अपवर्जित कर रखा है।
- श्रुतलेख जैसे रीयल-टाइम स्पीच-टू-टेक्स्ट और अनुवाद मॉडल को तैनात करके, राज्य 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में वॉइस-आधारित इंटरफेस के माध्यम से सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ बना रहा है।
- इस परिवर्तन से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अर्द्ध-साक्षर आबादी को अपनी स्थानीय बोलियों का उपयोग करके जटिल सरकारी पोर्टलों के साथ संवाद स्थापित करने में सहायता मिलती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रशासनिक कार्यों में भागीदारी के लिये डिजिटल साक्षरता अब एक पूर्व शर्त नहीं रह गई है।
- हाल ही में, भाषिनी ने अपने समुदाय प्लेटफॉर्म पर 10,000 से अधिक योगदानकर्त्ताओं को जोड़ा है।
- कृषि में सटीक शासन: डिजिटल कृषि मिशन के माध्यम से, AI कृषि अर्थव्यवस्था को 'मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर' से बदलकर डेटा-संचालित उद्यम में बदल रहा है।
- सैटेलाइट इमेजरी, IoT सेंसर और मौसम विश्लेषण को एकीकृत करके, सरकार सीधे किसानों के मोबाइल फोन पर फसल स्वास्थ्य, मृदा की नमी और कीटों के प्रकोप पर अति-स्थानीय परामर्श प्रदान करती है।
- यह पूर्वानुमानित शासन मॉडल संसाधनों की बर्बादी को कम करता है और जलवायु अस्थिरता से ग्रामीण आजीविका की रक्षा करता है, जिससे राज्य की भूमिका प्रतिक्रियात्मक राहत प्रदाता से सक्रिय रणनीतिक भागीदार के रूप में परिवर्तित हो जाती है।
- एग्रीस्टैक को AI मॉडल के साथ एकीकृत करने से राज्य को व्यक्तिगत 'खेत-से-उपभोग तक' की जानकारी प्रदान करने में सहायता मिलती है, जिससे फसल खराब होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों के निर्णय लेने की क्षमता में सुधार लाने के लिये बहुभाषी AI उपकरण 'भारत-VISTAAR' की शुरुआत की गई।
- सैटेलाइट इमेजरी, IoT सेंसर और मौसम विश्लेषण को एकीकृत करके, सरकार सीधे किसानों के मोबाइल फोन पर फसल स्वास्थ्य, मृदा की नमी और कीटों के प्रकोप पर अति-स्थानीय परामर्श प्रदान करती है।
- स्थानीय प्रशासन में अति-दक्षता: ज़मीनी स्तर पर, AI SabhaSaar जैसे उपकरणों के माध्यम से 'राज्य-नागरिक' इंटरफेस को स्वचालित कर रहा है, जो ग्राम सभा की बैठकों को वास्तविक काल में लिप्यंतरण और सार-संक्षेप करने के लिये AI का उपयोग करता है।
- इससे यह सुनिश्चित होता है कि स्थानीय शासन संबंधी अभिलेख अपरिवर्तनीय, पारदर्शी और जनता के लिये तुरंत सुलभ हों, जिससे भ्रष्टाचार या दस्तावेज़ीकरण में मैन्युअल त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।
- ईग्रामस्वराज और ग्राम मंचित्र जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से AI-सक्षम शासन को और मज़बूत बनाया गया है। ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना के तहत विकसित और अप्रैल 2020 में शुरू किया गया ईग्रामस्वराज (eGramSwaraj), पंचायत के प्रमुख कार्यों— जिनमें योजना, बजट, लेखांकन, निगरानी, परिसंपत्ति प्रबंधन और भुगतान शामिल हैं, को एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली में समेकित करता है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में, इस प्लेटफॉर्म पर 2.53 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें जुड़ीं।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) 2026 के प्रारंभ में स्वास्थ्य सेवा में AI के लिये रणनीति (SAHI) के जारी होने के साथ एक AI-प्रथम पारिस्थितिकी तंत्र में विकसित हो रहा है।
- नेशनल हेल्थ स्टैक का उपयोग करते हुए, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कम सुविधाओं वाले इलाकों में प्रारंभिक रोग निगरानी और स्वचालित नैदानिक जाँच के लिये AI उपकरणों को तैनात कर रही है।
- उपचारात्मक मॉडल से निवारक स्वास्थ्य मॉडल की ओर यह परिवर्तन दीर्घकालिक स्वास्थ्य अभिलेखों द्वारा संचालित है, जिससे राज्य संकट चरम पर पहुँचने से पूर्व रोग-प्रसार पैटर्न का अनुमान लगाकर चिकित्सीय आपूर्ति का अनुकूल वितरण कर सकता है।
- उदाहरण के लिये, फरवरी 2026 तक, TB की जाँच के लिये AI-सक्षम उपकरणों के कारण प्रतिकूल परिणामों में 27% की कमी आई है।
- नेशनल हेल्थ स्टैक का उपयोग करते हुए, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कम सुविधाओं वाले इलाकों में प्रारंभिक रोग निगरानी और स्वचालित नैदानिक जाँच के लिये AI उपकरणों को तैनात कर रही है।
- ई-कोर्ट चरण III के माध्यम से न्यायिक दक्षता: भारत ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना में AI को एकीकृत करके, विशेष रूप से SUPACE और डिजिटल कोर्ट 2.1 जैसे उपकरणों के माध्यम से, अपने न्यायिक लंबित मामलों से निपट रहा है।
- ये प्रणालियाँ दस्तावेजों में मौजूद खामियों की इलेक्ट्रॉनिक जाँच को स्वचालित बनाती हैं और बुद्धिमत्तापूर्ण केस शेड्यूलिंग प्रदान करती हैं, जिससे न्याय में विलंब करने वाले 'प्रशासनिक अवरोध' में काफी कमी आती है।
- सर्वोच्च न्यायालय का AI-संचालित अनुवाद उपकरण SUVAS (सर्वोच्च न्यायालय विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर) अंग्रेज़ी निर्णयों एवं आदेशों को स्थानीय भाषाओं में परिवर्तित करता है।
- शासन नेतृत्व के एक टूल के रूप में AI कूटनीति: भारत वैश्विक AI कूटनीति को प्रतिबंधात्मक पश्चिमी नियमों से दूर ले जाकर ग्लोबल साउथ के लिये समावेशी, विकास-केंद्रित ढाँचों की ओर सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित कर रहा है।
- AI को केवल एक जोखिम के रूप में देखने के बजाय लोकतंत्रीकरण के उत्प्रेरक के रूप में प्रस्तुत करके, भारत एक अद्वितीय रणनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभा रही है।
- फरवरी 2026 में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में, भारत ने 7 तकनीकी-विधिक सिद्धांतों पर आधारित 'भारत AI शासन दिशानिर्देश' का शुभारंभ किया।
- इस आयोजन में 20 से अधिक देशों के नेता 'जन, पृथ्वी और प्रगति' दृष्टिकोण पर एकजुट होने के लिये एकत्रित हुए, जिससे अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी मंचों में भारत के उद्यमशीलता के मानक को मज़बूती मिली।
- AI इम्पैक्ट समिट- 2026 के दौरान, भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो गया।
- AI को केवल एक जोखिम के रूप में देखने के बजाय लोकतंत्रीकरण के उत्प्रेरक के रूप में प्रस्तुत करके, भारत एक अद्वितीय रणनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभा रही है।
- रक्षा रणनीति और निर्णय प्रणालियों में AI: भारत AI युग के लिये उपयुक्त स्वदेशी सैन्य सिद्धांत विकसित करने के लिये अपनी प्राचीन रणनीतिक बुद्धिमत्ता को आधुनिक एल्गोरिदम वॉरफेयर के साथ विशिष्ट रूप से एकीकृत कर रहा है।
- यह दृष्टिकोण इस बात को स्वीकार करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्धकला में मानवीय उत्तरदायित्व को अक्षुण्ण रखते हुए संज्ञानात्मक हेर-फेर और जटिल निर्णय-प्रक्रियाओं से निपटने हेतु विशिष्ट दार्शनिक ढाँचे की आवश्यकता होती है।
- 'प्रोजेक्ट उद्भव' के माध्यम से, भारतीय सेना अर्थशास्त्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित युद्धाभ्यास और पूर्वानुमानात्मक मॉडलिंग के साथ समन्वित कर रही है।
- रक्षा AI परिषद (DAIC) द्वारा संचालित यह पहल सुनिश्चित करती है कि भारत की युद्ध रणनीतियाँ सांस्कृतिक आधार बनाए रखें, साथ ही तीव्र-गति प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धक्षेत्रों के लिये तैयार रहें।
- AI सिस्टम के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सुरक्षित करना: भारत अपने विशाल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को हाइब्रिड साइबर-फिज़िकल हमलों से बचाने के लिये AI को एक रक्षात्मक कवच के रूप में प्रयोग कर रहा है।
- उन्नत विसंगति पहचान एल्गोरिदम का एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय, दूरसंचार और ऊर्जा ग्रिड राज्य-प्रायोजित व्यवधानों के प्रति समुत्थानशील बने रहें।
- हालिया निर्देशों के अंतर्गत स्वदेशी AI-आधारित खतरा-पहचान प्रणालियों को आधार, UPI और रक्षा संचार जैसी महत्त्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं के साथ प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा गया है।
- इसके अलावा, 9,500 से अधिक डेटासेट को होस्ट करने वाले AIKosh का उपयोग इन साइबर रक्षा मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिये किया जा रहा है, ताकि सीमापार डिजिटल अतिक्रमणों की पूर्व-पहचान की जा सके।
शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण से कौन-से प्रमुख मुद्दे उत्पन्न होते हैं?
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिये दुष्प्रचार और डीपफेक से खतरा: अति-यथार्थवादी डीपफेक कंटेंट का प्रसार राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ाकर और लोकतांत्रिक संस्थानों के विरुद्ध संज्ञानात्मक युद्ध को तेज़ करके राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालता है।
- इससे राज्य को बड़े पैमाने पर डिजिटल सेंसरशिप लागू करने के लिये विवश होना पड़ता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों के बीच एक नाजुक अंतर्विरोध उत्पन्न होता है।
- वर्ष 2024 और 2026 के दौरान, भारतीय सरकार के कंटेंट ब्लॉकिंग आदेशों में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई, जो दिसंबर 2024 में लगभग 12,600 से बढ़कर दिसंबर 2025 में 24,000 से अधिक हो गई।
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को बिना सहमति के बनाए गए डीपफेक एवं अंतरंग छवियों को हटाने के लिये 2 घंटे की सख्त समयसीमा अनिवार्य है।
- महत्त्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की बढ़ती भेद्यता: राज्य-प्रायोजित शत्रु तेज़ी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके परिष्कृत, बहु-आयामी साइबर हमलों को स्वचालित कर रहे हैं जो पारंपरिक प्रतिक्रियात्मक रक्षा प्रोटोकॉल को आसानी से मात दे देते हैं।
- भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के तीव्र विस्तार के कारण AI-संचालित रैंसमवेयर और फिशिंग अभियान पूरी अर्थव्यवस्था के लिये एक गंभीर प्रणालीगत भेद्यता बन गए हैं।
- वर्ष 2025 में, भारत के CERT-In ने 29.44 लाख साइबर घटनाओं का निपटान किया, जो एल्गोरिदम संबंधी खतरे के परिदृश्य के विशाल पैमाने को रेखांकित करता है।
- भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित खतरों को कम करने की क्षमता को मज़बूत करने के लिये सत्र 2025-26 के केंद्रीय बजट में साइबर सुरक्षा के लिये 782 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं।
- विदेशी AI हार्डवेयर और कंप्यूटिंग इकोसिस्टम पर निर्भरता: रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करने की भारत की कोशिश AI के भौतिक आधार, जैसे उन्नत GPU और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिये विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर इसकी भारी निर्भरता से गंभीर रूप से बाधित है।
- अनुमान लगाने की प्रक्रिया और डेटा सर्वरों पर पूर्ण स्थानीय नियंत्रण के बिना, भारत का 'सॉवरेन AI' अवसंरचना भू-राजनीतिक निर्यात नियंत्रणों और विदेशी खुफिया जानकारी के अवरोधन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनी हुई है।
- 'IndiaAI मिशन' के बावजूद, राज्य को विदेशी डिज़ाइन वाले चिप्स (NVIDIA/AMD) और हाइपरस्केल क्लाउड प्रदाताओं (AWS/Azure) पर अत्यधिक निर्भरता के कारण एक रणनीतिक 'कंप्यूट डिवाइड' का सामना करना पड़ता है।
- परिणामस्वरूप, स्वतंत्र हार्डवेयर आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना और बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर निवेश को क्रियान्वित करना समकालीन भारत-अमेरिका तकनीकी कूटनीति में एक उन्मत्त, उच्च जोखिम वाली प्राथमिकता बन गई है।
- सेवा क्षेत्र में रोज़गार विस्थापन और आर्थिक व्यवधान: 'एजेंटिक AI' (निरंतर, बहु-चरणीय स्वायत्त कोडिंग में सक्षम प्रणालियाँ) का तीव्र विकास विश्व के अग्रणी IT सेवा निर्यातक के रूप में भारत के प्रभाव को सीधे तौर पर खतरे में डालता है।
- इस तकनीकी परिवर्तन से लाखों ज्ञान-आधारित कर्मचारियों के विस्थापन का खतरा है, जिससे जनांकिकीय लाभांश को आघात पहुँच सकता है, जो मूल रूप से भारत की सॉफ्ट पावर और आर्थिक कूटनीति का आधार है।
- विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित स्वचालन वर्ष 2030 तक भारत की 23% तक नौकरियों को विस्थापित कर सकता है, जिससे 10 करोड़ से अधिक श्रमिक प्रभावित होंगे।
- सैन्य-नागरिक संलयन अंतराल के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा असंतुलन: रक्षा अनुसंधान एवं विकास निवेश में भारी असमानता भारत को क्षेत्रीय शत्रुओं के प्रति संवेदनशील बनाती है, जो वाणिज्यिक AI को निर्बाध रूप से सैन्यीकरण करने के लिये आक्रामक सैन्य-नागरिक संलयन (MCF) रणनीतियों का उपयोग करते हैं।
- यह असंतुलन अत्यधिक विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में घातक स्वायत्त प्रणालियों, सस्ते ड्रोन समूहों और AI-सहायता प्राप्त निगरानी नेटवर्क की तैनाती को गति देता है।
- जहाँ चीन निजी तकनीक को अपने सैन्य तंत्र में गहराई से एकीकृत कर रहा है, वहीं भारत अत्याधुनिक, सॉवरेन AI अनुसंधान के लिये अपने कुल रक्षा बजट का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही आवंटित करता है।
- चीन ने आधिकारिक तौर पर MCF को राष्ट्रीय रणनीति का दर्जा दे दिया है, जिससे वह AI और क्वांटम तकनीक में नागरिक नवाचारों का ‘निर्बाध सैन्यीकरण’ कर पाता है।
- यद्यपि भारत ने नवाचार उत्कृष्टता रक्षा पहल जैसी पहलों के माध्यम से प्रगति की है, तथापि आलोचकों का मत है कि भारत के पास तुलनीय, पूर्ण-पैमाने का एकीकृत सैन्य-नागरिक समेकन ढाँचा नहीं है।
- एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रह और डिजिटल उपनिवेशीकरण का खतरा: मुख्य रूप से पश्चिमी डेटासेट पर प्रशिक्षित मूलभूत AI मॉडल पर निर्भरता से एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रह को बढ़ावा मिलने और वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक एवं भू-राजनीतिक आख्यानों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का खतरा है।
- भारत जैसे जनसांख्यिकीय रूप से जटिल देश में, शहरी क्षेत्रों के पक्षपाती डेटासेट पर प्रशिक्षित एल्गोरिदम ग्रामीण नागरिकों को कल्याणकारी लाभ या ऋण से अनुचित रूप से वंचित कर सकता है।
- इससे एक 'डिजिटल जाति व्यवस्था' का निर्माण होता है, जहाँ मशीन का आउटपुट, जिसे प्रायः वस्तुनिष्ठ माना जाता है, तकनीकी दक्षता के बहाने ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं को मज़बूत करता है।
- ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में, AI उपकरण प्रायः 'मानक' बोलियों या व्यवहारों को प्राथमिकता देते हैं, अनजाने में जनजातीय या उपेक्षित समूहों को दरकिनार कर देते हैं, जिनका डेटा प्रशिक्षण सेट में अनुपस्थित होता है।
- भारत जैसे जनसांख्यिकीय रूप से जटिल देश में, शहरी क्षेत्रों के पक्षपाती डेटासेट पर प्रशिक्षित एल्गोरिदम ग्रामीण नागरिकों को कल्याणकारी लाभ या ऋण से अनुचित रूप से वंचित कर सकता है।
पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करते हुए भारत शासन-प्रणाली में किस प्रकार AI का प्रभावी एकीकरण कर सकता है?
- तकनीकी-विधिक अनुपालन संरचना को क्रियान्वित करना: भारत को केवल स्वैच्छिक दिशानिर्देशों से आगे बढ़कर एक तकनीकी-कानूनी ढाँचे का संस्थानीकरण करना चाहिये, जो अनिवार्य तकनीकी मानकों के माध्यम से अनुपालन को सीधे AI जीवनचक्र में समाहित करे।
- इसमें 'डिज़ाइन द्वारा प्राइवेसी' और 'डिज़ाइन द्वारा बोधगम्यता' के सिद्धांतों का अंगीकरण शामिल है, जिसके अंतर्गत डेवलपर्स को स्वचालित पूर्वाग्रह-पहचान और डिजिटल वॉटरमार्किंग टूल को सार्वजनिक क्षेत्रीय क्रय हेतु अपरिहार्य स्थापत्य आवश्यकताओं के रूप में एकीकृत करना होगा।
- IT नियमों के तहत 'सेफ हार्बर' संरक्षण के लिये इन तकनीकी चिह्नों को एक पूर्वापेक्षा बनाकर, सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि जवाबदेही कोई बाद की विधिक बाधा नहीं बल्कि एक अंतर्निहित तकनीकी विशेषता हो।
- बहुस्तरीय एल्गोरिदम ऑडिटिंग और 'सैंडबॉक्स' परिनियोजन: नवाचार और सुरक्षा के बीच के अंतराल को समाप्त करने के लिये, भारत स्वास्थ्य सेवा या पुलिसिंग जैसे विशिष्ट शासन क्षेत्रों के जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप एक स्तरीय 'नियामक सैंडबॉक्स' मॉडल लागू कर सकता है।
- उच्च जोखिम वाले AI अनुप्रयोगों को पूर्ण पैमाने पर सार्वजनिक तैनाती से पहले प्रस्तावित IndiaAI सेफ्टी इंस्टीट्यूट की देख-रेख में इन नियंत्रित वातावरणों के भीतर 'एडवर्सरियल टेस्टिंग' और 'रेड-टीमिंग' से गुजरना चाहिये।
- यह उपाय सुनिश्चित करता है कि 'एजेंटिक' प्रणालियाँ, जो स्वायत्त निर्णय लेने में सक्षम हैं, भारतीय जनांकिकीय जटिलताओं और भाषाई बारीकियों के विरुद्ध तनाव-परीक्षण से गुजरें ताकि बड़े पैमाने पर प्रशासनिक त्रुटियों या 'स्वचालित बहिष्करण' को रोका जा सके।
- AIKosh और DPI एकीकरण के माध्यम से एकीकृत डेटा शासन: शासन में प्रभावी AI उच्च-गुणवत्ता वाले, सांस्कृतिक रूप से प्रतिनिधि डेटासेट पर निर्भर करता है, जिसे 'AIKosh' राष्ट्रीय डेटा प्लेटफॉर्म का उपयोग करके एक एकीकृत डेटा शासन मॉडल के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है।
- आधार और डिजिलॉकर जैसे मौजूदा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के साथ AI को एकीकृत करके, सरकार 'सॉवरेन AI' मॉडल बना सकती है जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम का पालन करते हुए गुमनाम, सहमति-आधारित डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं।
- यह दृष्टिकोण डेटा साइलो को रोकता है और यह सुनिश्चित करता है कि ग्रामीण शासन में उपयोग किये जाने वाले AI मॉडल, जैसे कि ग्राम मानचित्र, पक्षपाती पश्चिमी-केंद्रित डेटासेट पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय संदर्भों के लिये अनुकूलित हों।
- एल्गोरिदम आधारित जवाबदेही और निवारण केंद्रों का संस्थागतकरण: शासन संबंधी AI को एक मज़बूत संस्थागत पदानुक्रम द्वारा समर्थित होना चाहिये, जिसमें एक अंतर-मंत्रालयी AI शासन समूह और राज्य स्तर पर विशेष 'प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समितियाँ' शामिल हों।
- इन निकायों को प्रत्येक स्वचालित सार्वजनिक निर्णय के लिये 'स्पष्टीकरणीयता संबंधी प्रमाण' अनिवार्य करना चाहिये, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई नागरिक AI-संचालित सेवा अस्वीकृति के लिये मानव-समझने योग्य औचित्य का अनुरोध कर सके।
- AI-साक्षर लोकपालों से सुसज्जित विकेंद्रीकृत 'शिकायत निवारण केंद्रों' की स्थापना यह सुनिश्चित करेगी कि 'जिम्मेदारी का अंतर' समाप्त हो जाए, जिससे नागरिकों को एल्गोरिदम परिणामों को चुनौती देने तथा मानवीय स्वायत्तता को बनाए रखने के लिये एक स्पष्ट विधिक मार्ग मिल सके।
- भाषिनी और ज़मीनी स्तर की क्षमता के माध्यम से अति-स्थानीयकृत AI एकीकरण: समावेशी शासन सुनिश्चित करने के लिये, AI एकीकरण में 'भाषिनी' जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से भाषाई पहुँच को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, जिससे सभी अनुसूचित भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय में सेवा वितरण सक्षम हो सके।
- व्यवहारिक कार्यान्वयन में पंचायत स्तर पर 'SabhaSaar' जैसे उपकरणों को तैनात करना शामिल है ताकि बहुभाषी दस्तावेज़ीकरण एवं परियोजना निगरानी को स्वचालित किया जा सके, जिससे ग्रामीण प्रशासकों के लिये डेटा-संचालित योजना का लोकतंत्रीकरण हो सके।
- गतिशील एल्गोरिदम ट्रैसेबिलिटी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल: 'डीपफेक गवर्नेंस' एवं कृत्रिम भ्रामक सूचना के खतरे से निपटने के लिये AI द्वारा उत्पन्न सभी आधिकारिक संचारों के लिये अनिवार्य तकनीकी ट्रैसेबिलिटी और मेटाडेटा एम्बेडिंग की आवश्यकता होती है।
- भारत एक 'त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल' लागू कर सकता है जो दुर्भावनापूर्ण कृत्रिम कंटेंट को हटाने की समयसीमा को तीन घंटे से कम कर दे और महत्त्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिये स्वचालित 'सूचना अखंडता' ऑडिट द्वारा समर्थित हो।
- रणनीतिक संप्रभु कंप्यूटिंग और सार्वजनिक-निजी AI गठबंधन: भारत को IndiaAI मिशन के तहत एक 'संप्रभु कंप्यूटिंग अवसंरचना' का क्रियान्वयन करना चाहिये ताकि सार्वजनिक हित में AI पर काम कर रहे घरेलू स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों को रियायती दरों पर उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
- 'सार्वजनिक-निजी सह-नवाचार मॉडल' की स्थापना करके, सरकार निजी तकनीकी दिग्गजों को 'सार्वजनिक हित के LLM' बनाने के लिये प्रोत्साहित कर सकती है, जो विशेष रूप से भारतीय नियामक नैतिकता एवं प्रशासनिक कार्यप्रवाह के लिये तैयार किये गए हों।
- एल्गोरिदम प्रभाव आकलन (AIA) और गतिशील जोखिम लेबलिंग: प्रत्येक सरकारी विभाग, जो किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली को लागू करना चाहता है, उसके लिये ‘एल्गोरिद्मिक प्रभाव आकलन’ करना अनिवार्य होना चाहिये, ताकि विभेदकारी प्रभाव, गोपनीयता अतिक्रमण और सुरक्षा-संवेदनशीलताओं की संभावना का मूल्यांकन किया जा सके।
- यह ढाँचा 'डायनामिक रिस्क लेबलिंग' प्रणाली का उपयोग करेगा, जहाँ AI उपकरणों को उनकी स्वायत्तता के स्तर तथा उनके द्वारा उपयोग किये जाने वाले शासन क्षेत्र की गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत (जैसे, हरा, एम्बर, लाल) किया जाता है।
निष्कर्ष:
शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश एक 'सक्रिय राज्य' की ओर एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, जो एल्गोरिदम की दक्षता को नैतिक सुरक्षा उपायों और संवैधानिक जवाबदेही के साथ संतुलित करता है। सफलता एक 'मानव-केंद्रित' दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, जो समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिये डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लाभ उठाता है, साथ ही एल्गोरिदम पूर्वाग्रह एवं सूचनात्मक अखंडता के क्षरण जैसे जोखिमों को सख्ती से कम करता है। अंततः, भारत की 'सक्रिय शासन' की यात्रा संप्रभु तकनीकी नवाचार को पारदर्शिता तथा जनविश्वास के सिद्धांतों के साथ सामंजस्य स्थापित करने की उसकी क्षमता से परिभाषित होगी।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न “भारत में शासन के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक शक्ति गुणक के रूप में उभर रही है, लेकिन यह गंभीर चुनौतियाँ भी खड़ी करती है।” परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को किस प्रकार रूपांतरित कर रही है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिक्रियात्मक प्रशासन से पूर्वानुमान-आधारित तथा आँकड़ा-संचालित निर्णय-निर्माण की ओर संक्रमण को सक्षम बना रही है।
‘इंडिया एआई मिशन’, ‘भाषिणी’, ‘कृषि स्टैक’ तथा ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्टैक’ जैसी पहलों के माध्यम से सेवा वितरण, समावेशन और दक्षता में वृद्धि हो रही है।
परिशुद्ध कृषि से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायित न्यायिक प्रक्रियाओं तक, प्रौद्योगिकी राज्य की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ कर रही है तथा नागरिकों के परिणामों में सुधार ला रही है।
प्रश्न 2. समावेशी और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को प्रोत्साहित करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्या भूमिका है?
‘भाषिणी’ जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित मंच बहुभाषीय तात्कालिक अनुवाद तथा वाणी-आधारित पहुँच उपलब्ध कराकर भाषाई अवरोधों को समाप्त कर रहे हैं।
‘सभासार’ तथा ‘ई-ग्राम स्वराज’ जैसे उपकरण जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और पहुँच-सुगमता को सुदृढ़ करते हैं।
इससे यह सुनिश्चित होता है कि अर्द्ध-साक्षर और ग्रामीण आबादी भी सार्वजनिक सेवाओं के साथ प्रभावी रूप से जुड़ सके।
प्रश्न 3. शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंगीकरण से जुड़े प्रमुख जोखिम क्या हैं?
प्रमुख चिंताओं में ‘डीपफेक’-आधारित भ्रामक सूचना, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना पर साइबर आक्रमण, कलन-विधिक पक्षपात तथा स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता सम्मिलित हैं।
विदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता हार्डवेयर पर निर्भरता तथा रोज़गार विस्थापन का जोखिम इस परिदृश्य को और अधिक जटिल बनाते हैं।
यदि इन चुनौतियों का समाधान न किया जाये, तो ये जन-विश्वास, संस्थागत अखंडता तथा आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं।
प्रश्न 4. भारत के लिये संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना आँकड़ा सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता तथा भू-राजनीतिक व्यवधानों के विरुद्ध प्रत्यास्थता सुनिश्चित करती है।
घरेलू संगणन क्षमता तथा स्वदेशी आँकड़ा-संग्रह विकसित करके भारत विदेशी प्रौद्योगिकियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है।
संवेदनशील प्रशासनिक प्रणालियों की सुरक्षा तथा महत्त्वपूर्ण डिजिटल पारितंत्रों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिये यह अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 5. शासन में उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एकीकरण सुनिश्चित करने के लिये किन उपायों की आवश्यकता है?
भारत को कलन-विधिक अंकेक्षण, विनियामक परीक्षण-क्षेत्र तथा ‘कलन-विधिक प्रभाव आकलन’ सहित एक प्रौद्योगिकी-विधिक ढाँचा अपनाना चाहिये।
संघीयकृत आँकड़ा शासन (‘एआईकोश’) को सुदृढ़ करना, व्याख्येयता सुनिश्चित करना तथा शिकायत-निवारण तंत्र स्थापित करना आवश्यक है।
मज़बूत संस्थागत पर्यवेक्षण के साथ मानव-केंद्रित दृष्टिकोण नवाचार और उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन स्थापित करने में सहायक होगा।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न 1. विकास की वर्तमान स्थिति के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य प्रभावी ढंग से कर सकती है? (2020)
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत् की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच (Text- to- Speech) में परिवर्तन
- विद्युत् ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1, 2, 3 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: (d)
मेन्स
प्रश्न 1. भारत के प्रमुख शहरों में आई.टी. उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं? (2021)
प्रश्न 2. “चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेन्स को सरकार का अविभाज्य अंग बनाने में पहल की है"। विवेचन कीजिये। (2020)