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क्या होना चाहिये बैड लोन की समस्या का हल? | 07 May 2018 | भारतीय अर्थव्यवस्था

संदर्भ
विजय माल्या और नीरव मोदी के मामलों के बीच एक निराशाजनक समानता है। दोनों ने भारतीय बैंकों को 22,000 करोड़ रुपए से अधिक का चूना लगाया और देश छोड़कर भाग गए। यदि इस मुद्दे पर गहराई से विचार करें, तो पाएंगे कि 22,000 करोड़ रुपए की यह परिसंपत्ति बैंकों की कुल गैर-निष्पादित संपत्ति (Non-Performing Assets (NPAs) का एक छोटा सा हिस्सा है, वास्तविक रूप में यह कई लाख करोड़ रुपए के आँकड़े में है।

क्या हैं गैर-निष्पादनकारी परिसम्पतियाँ?

एनपीए का प्रबंधन कैसे किया जाए?

एनपीए के प्रबंधन में आने वाली दिक्कतें

बासेल नियम

उद्देश्य

‘बैड बैंक' क्या है?

बैड बैंक का सिद्धांत

बासेल 3 की समय-सीमा में वृद्धि

बैड बैंक से संबंधित समस्याएँ

इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
आर्थिक विशेषज्ञों द्वारा इस समस्या के समाधान हेतु निम्नलिखित पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया गया है-

इंद्रधनुष योजना

वरिष्ठ कर्मचारियों को आवश्यक ट्रेनिंग उपलब्ध कराना

सतर्कता को सुदृढ़ बनाना

समयबद्ध जाँच की व्यवस्था की जानी चाहिये

जवाबदेही को बढ़ाना

प्रतिभूति हित प्रवर्तन एवं ऋणों की वसूली  के कानून एवं विविध प्रावधान (संशोधन) कानून, 2016

अन्य महत्त्वपूर्ण उपाय क्या हो सकते हैं?

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये आगे की राह

निष्कर्ष
भारत की बैंकिंग प्रणाली ऐसी चुनौती भरी पृष्ठभूमि में अपेक्षाकृत लंबे समय से कार्य कर रही है, जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आस्ति गुणवत्ता, पूंजी पर्याप्तता तथा लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इनके मद्देनज़र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वैश्विक जोखिम मानदंडों के अनुरूप उनकी पूंजी ज़रूरतों को पूरा करने और क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिये पूंजी लगा रही है। लेकिन एनपीए का स्तर 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाने के कारण चिंता होना स्वाभाविक है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि किसी काम की नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि एनपीए को कम करने का उपाय उसके मर्ज़ में छिपा है। बैंक में व्याप्त अंदरूनी तथा अन्य खामियों का इलाज, बैंक के कार्यकलापों में बेवज़ह दखलंदाज़ी पर रोक, मानव संसाधन में बढ़ोतरी आदि की मदद से बढ़ते एनपीए पर निश्चित रूप से काबू पाया जा सकता है।

प्रश्न:  दिनोंदिन बढ़ती एनपीए की समस्या के संदर्भ में विचार करते हुए इसके अर्थ, निवारण तथा सरकारी प्रयासों की चर्चा कीजिये। साथ ही, इस समस्या के संदर्भ में बैंड बैंक की परिकल्पना पर भी प्रकाश डालते हुए स्पष्ट कीजिये कि यह किस प्रकार प्रभावी कार्यवाही कर सकती है?