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रिक्त पद बनाम लंबित मामले (A Crippling Shortage) | 21 Nov 2018 | भारतीय राजनीति

संदर्भ

हाल ही के नवीनतम आँकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 3.3 करोड़ लंबित मामलों का बैकलॉग है जिसमें से लगभग 2.84 करोड़ मामले अधीनस्थ अदालतों में लंबित हैं। न्यायपालिका में मानव संसाधन की कमी लंबित मामलों की लापरवाही के लिये उत्तरदायी है। इन मामलों का स्वतः संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने देश की निचली अदालतों में रिक्तियों को भरने में की जाने वाली देरी के संबंध में राज्य सरकारों और विभिन्न उच्च न्यायालयों के प्रशासन की आलोचना की है।

संबंधित तथ्य और आँकड़े

भर्ती प्रक्रिया

अधीनस्थ न्यायालय का ढाँचा

अधीनस्थ न्यायालय में व्यापक रूप से तीन कैडर के न्यायाधीश शामिल हैं, जो इस प्रकार है :

उल्लेखनीय है कि ज़िला स्तर पर, ज़िला न्यायालय शीर्ष पर स्थित है और सभी नागरिक तथा आपराधिक मामलों के लिये यह अपीलीय अदालत है। यह सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अध्यक्षता वाली अन्य अदालतों के लिये पर्यवेक्षक की भूमिका निभाता है।

रिक्तियों का कारण

रिक्तियों से उत्पन्न समस्याएँ

आगे की राह