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पीत-ज्वर टीका | 22 Jan 2019 | विविध

चर्चा में क्यों?


हाल ही में 67 वर्षीय प्रोफेसर ‘मार्टिन गोर’ की पीत ज्वर से मृत्यु हो गई। प्रोफेसर गोर ब्रिटेन में रॉयल मार्सडेन अस्पताल के पूर्व चिकित्सा निदेशक एवं एक प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ थे। नियमित टीकाकरण के बाद भी इस बीमारी के कारण हुई उनकी मृत्यु ने एक बार फिर से पीत ज्वर संबंधी टीकाकरण (Vaccination) को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

पीत ज्वर टीकाकरण क्यों आवश्यक है?

पीत ज्वर टीकाकरण कितना सुरक्षित है?

पीत ज्वर टीकाकरण के क्या-क्या जोखिम हैं?

इतने जोखिमों के बाद टीकाकरण क्यों आवश्यक है?

भारत में टीकाकरण की स्थिति

वर्तमान में वैक्सीन के प्रति संकोच दुनिया भर में एक गंभीर समस्या है। अमेरिका जैसे देश (मिनेसोटा राज्य) में भी विशेष रूप से अप्रवासी लोगों में टीकाकरण के प्रति संदेह व्याप्त है। हाल ही में एक ब्रिटिश डॉक्टर के चिकित्सीय निरीक्षण दौरे के दौरान उनके चिकित्सीय प्रेक्टिस लाइसेंस को भीड़ द्वारा छीन लिया गया तथा टीकाकरण के खिलाफ आवाज़ उठाई गई। यदि अमेरिका जैसे विकसित देश में टीकाकरण के संबंध में आमजन में इतना अधिक आक्रोश है तो विकासशील देशों द्वारा भी इस समस्या के संदर्भ में गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है। विकास की राह पर अग्रसर भारत जैसे विकासशील देश के नीतिनिर्माताओं को इस विषय पर गंभीर कदम उठाने चाहिये तथा आवश्यक शोध एवं अनुसंधान कार्यों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।


स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस