ज़ाइलोफिस दीपकी | 04 May 2021

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक छोटे साँप की प्रजाति "ज़ाइलोफिस दीपकी" (Xylophis Deepaki) का नामकरण एक भारतीय सरीसृप विज्ञानवेत्ता दीपक वीरप्पन के नाम पर किया गया है। इन्होंने ‘वुड स्नेक’ (Wood Snake) को समायोजित करने के लिये एक नए उप-वर्ग ज़ाइलोफिनाइने (Xylophiinae) का निर्माण करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

  • इन प्रजातियों के लिये सुझाया गया सामान्य नाम 'दीपक वुड स्नेक' (Deepak Wood Snake) है।

Xylophis-Deepaki

प्रमुख बिंदु

ज़ाइलोफिस दीपकी के विषय में:

  • यह इंद्रधनुष की तरह चमकीली शल्क वाला मात्र 20 सेमी. लंबाई का एक छोटा साँप है।
  • इसे पहली बार कन्याकुमारी में एक नारियल के बागान में देखा गया था।
  • इसे तमिलनाडु की एक स्थानिक प्रजाति बताया गया है, जिसे दक्षिणी पश्चिमी घाट (Western Ghat) के कुछ हिस्सों में भी देखा गया है।
    • यह सूखे क्षेत्रों में और अगस्त्यमलाई पहाड़ियों (Agasthyamalai Hill) के आसपास कम ऊँचाई पर पाया जाता है।

ज़ाइलोफिस के विषय में:

  • यह पैरेडाइए फैमिली (Pareidae Family) में सांपों का एक छोटा सा जीन है।
  • इसकी पाँच प्रजातियाँ हैं जो सभी दक्षिणी भारत में पश्चिमी घाट के लिये स्थानिक हैं।
    • पाँच प्रजातियाँ: ज़ाइलोफिस कप्तैनी (Xylophis Captaini), ज़ाइलोफिस दीपकी (Xylophis Deepaki), ज़ाइलोफिस मोसैकस (Xylophis Mosaicus), ज़ाइलोफिस पेर्रोटेरी (Xylophis Perroteri) और ज़ाइलोफिस स्टेनोरिन्चस (Xylophis Stenorhynchus)।
  • ये पाँच प्रजातियाँ ज़ाइलोफिनाइने (Xylophiinae) उप-परिवार का गठन करती हैं।
    • ये भारत में पाए जाने वाले एकमात्र पैरेडाइए साँप हैं और इस परिवार के दक्षिण-पूर्व एशिया के बाहर पाए जाने वाले एकमात्र साँप हैं।

वुड स्नेक के विषय में:

  • ये गैर-विषैले होते हैं, जिन्हें अक्सर पश्चिमी घाट के जंगलों में और खेतों में मिट्टी की खुदाई करते समय देखा जाता है।
  • इनका प्रमुख भोजन केंचुए और अन्य अकशेरुकीय जीव होते हैं।
  • इनके निकट संबंधी पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं जो आर्बरियल (Arboreal- पेड़ों में रहने वाले) वर्ग के होते हैं।

संबंधित जानकारी:

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों से संबंधित रेड लिस्ट (Red List) के अनुसार मूल्यांकन की गई साँपों की प्रजातियों में से 12% को खतरा है और इनकी आबादी में गिरावट आई है।
  • विश्व में प्रत्येक वर्ष 2.7 मिलियन लोग सर्पदंश के शिकार होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विकासशील देशों में सर्पदंश को कम करने के लिये इसे एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (Neglected Tropical Disease) के रूप में वर्गीकृत किया है।
  • ‘सेव द स्नेक’ (Save The Snake) साँप संरक्षण और मानव-साँप संघर्ष शमन के लिये एक समर्पित पहल है।

अगस्त्य पहाड़ी

  • अगस्त्य पहाड़ी केरल के पश्चिमी घाट में नेय्यर वन्यजीव अभयारण्य (Neyyar Wildlife Sanctuary) के भीतर स्थित समुद्र तल से 1,868 मीटर ऊँची चोटी है। यह चोटी केरल और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिज़र्व (Agasthyamala Biosphere Reserve) की एक हिस्सा है।
  • इस चोटी का नाम हिंदू ऋषि अगस्त्य के नाम पर रखा गया है, जिन्हें हिंदू पुराणों के सात ऋषियों (सप्तऋषि) में से एक माना जाता है। यह श्रद्धालुओं का एक तीर्थ स्थल भी है।
  • ताम्रपर्णी नदी (Thamirabarani River) एक बारहमासी नदी है जो इस पहाड़ी के पूर्वी हिस्से से निकलती है और तमिलनाडु के तिरुनेलवेली (Tirunelveli) ज़िले में बहती है।
  • अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिज़र्व को वर्ष 2016 में यूनेस्को की विश्व नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिज़र्व की सूची (UNESCO World Network of Biosphere Reserve) में जोड़ा गया है।

स्रोत: द हिंदू