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मानसून की भविष्यवाणी | 22 Jul 2019 | भूगोल

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में मानसून के गलत पूर्वानुमानों से इनके मापदंडों पर फिर से प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं।

प्रमुख बिंदु:

2010 तक IMD मानसून का पूर्वानुमान का सांख्यिकीय मॉडल:

2015 के बाद का पूर्वानुमान मॉडल:

विशेषज्ञों के अनुसार भारत का जल संकट भूजल संसाधनों के अति-निष्कर्षण और वर्षा जल तथा सतही जल के पर्याप्त भंडारण के अभाव के कारण बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग ने मानसून के दौरान जलाशयों के पुनर्भरण और वर्षा के मौसम के बाद इनके प्रयोग से संबंधित अनुशंसाएँ जारी की हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाले कारक:

  1. एल नीनो और ला नीना: ये प्रशांत महासागर के पेरू तट पर होने वाली परिघटना है । एल नीनो के वर्षों के दौरान समुद्री सतह के तापमान में बढ़ोत्तरी होती है और ला नीना के वर्षों में समुद्री सतह का तापमान कम हो जाता है। सामान्यतः एल नीनो वर्षों में भारत में मानसून कमज़ोर जबकि ला नीना वर्षों में मानसून मज़बूत होता है।
  2. हिंद महासागर द्विध्रुव: हिंद महासागर द्विध्रुव के दौरान हिंद महासागर का पश्चिमी भाग पूर्वी भाग की अपेक्षा ज़्यादा गर्म या ठंडा होता रहता है। पश्चिमी हिंद महासागर के गर्म होने पर भारत के मानसून पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि ठंडा होने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  3. मेडेन जुलियन ऑस्किलेशन (OSCILLATION): इसकी वजह से मानसून की प्रबलता और अवधि दोनों प्रभावित होती है। इसके प्रभावस्वरुप महासागरीय बेसिनों में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की संख्या और तीव्रता भी प्रभावित होती है, जिसके परिणामस्वरूप जेट स्ट्रीम में भी परिवर्तन आता है। यह भारतीय मानसून के सन्दर्भ में एल नीनो और ला नीना की तीव्रता और गति के विकास में भी योगदान देता है।
  4. चक्रवात निर्माण: चक्रवातों के केंद्र में अति निम्न दाब की स्थिति पाई जाती है जिसकी वजह से इसके आसपास की पवनें तीव्र गति से इसके केंद्र की ओर प्रवाहित होती हैं। जब इस तरह की परिस्थितियाँ सतह के नज़दीक विकसित होती हैं तो मानसून को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। अरब सागर में बनने वाले चक्रवात, बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों से अधिक प्रभावी होते हैं क्योंकि भारतीय मानसून का प्रवेश प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अरब सागर की ओर होता है।
  5. जेट स्ट्रीम: जेट स्ट्रीम पृथ्वी के ऊपर तीव्र गति से चलने वाली हवाएँ हैं, ये भारतीय मानसून को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।

स्रोत: द हिंदू