शहरी कृषि | 03 Feb 2023

प्रिलिम्स के लिये:

शहरी कृषि, स्वस्थ भोजन, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक विकास, जैव प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक नवाचार और खोज।

मेन्स के लिये:

शहरी कृषि, संबंधित चुनौतियाँ और इसकी क्षमता।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन ने शहरी कृषि (Urban Farming) हेतु समग्र ढाँचे की सिफारिश करते हुए "दिल्ली में शहरी कृषि के लिये नागरिक नीति प्रारूप (Draft Citizen’s Policy for Urban Agriculture in Delhi)" तैयार किया है।

  • यह प्रारूप मौजूदा प्रथाओं पर निर्माण, छत और किचन गार्डन के माध्यम से आवासीय तथा सामुदायिक कृषि को बढ़ावा देने, कृषि उपयोग हेतु खाली भूमि आवंटित करने, बाज़ार स्थापित करने, पशु पालन के लिये नीतियाँ विकसित करने एवं जागरूकता बढ़ाने की सिफारिश करता है।

शहरी कृषि:

  • परिचय: 
    • शहरी कृषि से तात्पर्य शहरी क्षेत्रों के भीतर फसल उगाने, पशुधन बढ़ाने या अन्य प्रकार के खाद्यान्न के उत्पादन से है।
    • ताज़ा और स्वस्थ भोजन, पर्यावरणीय स्थिरता एवं आर्थिक विकास तक पहुँच में वृद्धि के संभावित लाभों के बावजूद शहरी कृषि को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो इसके प्रभाव को सीमित करती है अर्थात् इसे व्यापक रूप से अपनाना कठिन है। 
  • चुनौतियाँ: 
    • सीमित भूमि उपलब्धता:  
      • शहरी कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक शहरी क्षेत्रों के भीतर उपयुक्त भूमि की सीमित उपलब्धता है।
      • शहरी भूमि अक्सर महँगी होती है और अन्य उपयोगों के लिये अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होती है, जिससे किसानों द्वारा खाद्यान्न उगाने के लिये आवश्यक स्थान सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता है।  
    • मृदा प्रदूषण:  
      • शहरी मृदा अक्सर भारी धातुओं, प्रदूषकों और अन्य ज़हरीले पदार्थों से दूषित होती है, जिससे फसलों को सुरक्षित एवं टिकाऊ तरीके से उगाना मुश्किल हो जाता है।
    • जल की अनुपलब्धता:  
      • कई शहरी क्षेत्रों में जल एक दुर्लभ संसाधन है और किसान अक्सर अपनी फसलों एवं पशुओं की ज़रूरतों को पूरा करने हेतु पर्याप्त जल तक पहुँचने के लिये संघर्ष करते हैं। 
    • बुनियादी ढाँचे की कमी:  
      • शहरी कृषि के लिये अक्सर विशेष बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है, जैसे कि ग्रीनहाउस, सिंचाई प्रणाली और शीतलन तथा भंडारण सुविधाएँ, ये सभी शहरी क्षेत्रों में महँगी होने के साथ ही सुलभ नहीं हैं।

समाधान: 

  • साझेदारी विकसित करना: 
    • शहरी कृषि स्थानीय सरकारों और अन्य संगठनों के साथ साझेदारी किये जाने से लाभान्वित हो सकती है जो कुछ चुनौतियों से निपटने में सहायता और संसाधन प्रदान कर सकते हैं।
  • निवेश: 
    • शहरी कृषि में किया जाने वाला शोध कुछ प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने में मदद कर सकता है और शहरी क्षेत्रों में खाद्यान उत्पादन के लिये सर्वोत्तम प्रथाओं में नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है।
  • सामुदायिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करना:  
    • शहरी कृषि की सफलता के लिये सामुदायिक जुड़ाव महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह समर्थन जुटाने, संसाधनों को एकजुट करने और स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
  • शहरी कृषि नीतियाँ:  
    • शहरी कृषि पहलों में वृद्धि कर और विकास में सहयोग देने वाली नीतियाँ बनाकर सरकारें तथा अन्य संगठन शहरी कृषि को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकते हैं। 

भारत में कुछ संबंधित पहलें: 

  • वर्ष 2008 में पुणे के नागरिक प्रशासन ने आवंटित भूमि पर कृषि के लिये लोगों को प्रशिक्षित और प्रोत्साहित करने के लिये एक शहरी कृषि परियोजना शुरू की।
  • वर्ष 2012 में केरल सरकार ने घरों, विद्यालयों, सरकारी और निजी संस्थानों में बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिये सब्जी विकास कार्यक्रम शुरू किया।
    • इसने पर्यावरण के अनुकूल इनपुट्स, सिंचाई, खाद और बायोगैस संयंत्रों के लिये सब्सिडी तथा सहयोग भी प्रदान किया।
  • वर्ष 2014 में तमिलनाडु सरकार ने अपनी शहरी बागवानी विकास योजना के तहत छतों, घरों और अपार्टमेंट में सब्जियाँ उगाने हेतु शहरवासियों के लिये "डू-इट-योरसेल्फ" किट पेश किया।
  • वर्ष 2021 से बिहार ने इनपुट लागत के लिये सब्सिडी के माध्यम से पाँच स्मार्ट शहरों में टैरेस गार्डनिंग को काफी प्रोत्साहित किया है।

आगे की राह 

  • शहरी कृषि को बढ़ावा देने के लिये सरकारों को अनौपचारिक प्रथाओं की पहचान कर उन्हें कृषि योजनाओं से जोड़ना चाहिये।
  • शहरी कृषि को व्यवहार्य बनाने की आवश्यकता है। जल की कमी तथा प्रदूषण से प्रभावित तंग शहरी क्षेत्रों में कृषि करना आसान नहीं है।  
    • हैदराबाद स्थित इंस्टीट्यूट फॉर रिसोर्स एनालिसिस एंड पॉलिसी द्वारा वर्ष 2016 में ‘फ्यूचर ऑफ अर्बन एग्रीकल्चर इन इंडिया’ नामक एक लेख में उल्लेख किया गया है कि दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद तथा चेन्नई में अपशिष्ट जल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शहरी कृषि के लिये उपयोग किया जाता है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि शहरी कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से उपज एवं मिट्टी की गुणवत्ता कम हो सकती है। हालाँकि शहरी किसानों का मानना है कि ऐसी बाधाओं को नवीन तकनीकों के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
  • शहरी कृषि में खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विकास संबंधी शहरों के समक्ष आने वाली कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करने में प्रमुख भूमिका निभाने की क्षमता है। हालाँकि वास्तव में इसकी क्षमता का अनुभव करने के लिये चुनौतियों को दूर करना तथा शहरी कृषि की पहल का समर्थन एवं पोषण करने वाला वातावरण बनाना आवश्यक है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. कृषि उत्पादन को बनाए रखने में एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) कहाँ तक सहायक है? (मुख्य परीक्षा, 2019)

प्रश्न. एकीकृत कृषि प्रणाली क्या है? यह भारत में छोटे और सीमांत किसानों के लिये किस प्रकार सहायक है? (मुख्य परीक्षा, 2022)

स्रोत: डाउन टू अर्थ