COVID-19 के उपचार हेतु HIV-रोधी दवाएँ | 18 Mar 2020

प्रीलिम्स के लिये:

COVID-19

मेन्स के लिये:

कोरोनावायरस महामारी से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोनोवायरस से संक्रमित व्यक्ति की स्थिति की गंभीरता के आधार पर HIV-रोधी दवाओं के उपयोग की सिफारिश की है।

प्रमुख बिंदु

  • 'COVID-19’ के ‘क्लिनिकल मैनेजमेंट' पर अपने संशोधित दिशा-निर्देशों में मंत्रालय ने 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिये इन दवाओं की सिफारिश की है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, विशेषज्ञों की एक समिति जिसमें एम्स के डॉक्टर, नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) के विशेषज्ञ और WHO के सदस्य शामिल थे, ने उपचार के दिशा-निर्देशों पर दोबारा गौर किया और कोरोनोवायरस संक्रमण से पीड़ित रोगियों के लिये सहायक उपचार की सिफारिश की है।

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश

  • मंत्रालय ने हाइपोक्सिया, हाइपोटेंशन, अंग की शिथिलता जैसे लक्षण वाले रोगियों के लिये लोपिनवीर/रितोनवीर (Lopinavir-Ritonavir) के संयोजन वाली HIV-रोधी दवाओं की सिफारिश की है।

लोपिनवीर/रितोनवीर (Lopinavir-Ritonavir) के संयोजन का उपयोग व्यापक रूप से HIV संक्रमण को नियंत्रित करने के लिये किया जाता है।

  • संदिग्ध या पुष्टि किये गए COVID-19 के रोगियों के लिये किसी विशिष्ट उपचार की सिफारिश करने हेतु यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (Randomised Controlled Trial) से कोई प्रमाण नहीं मिला है।
  • चिकित्सा विज्ञान से पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों के उपचार हेतु किसी विशिष्ट एंटी-वायरल की सिफारिश नहीं की गई है।
  • मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि लोपिनवीर/रितोनवीर का उपयोग केवल गंभीर मामलों में पीड़ित की सहमति के आधार पर ही किया जाएगा।
    • विदित है कि दवाओं के इस संयोजन का प्रयोग सर्वप्रथम एक बुजुर्ग इतालवी दंपत्ति पर किया गया था जो वर्तमान में जयपुर में COVID -19 का इलाज करा रहे हैं।
  • दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य लक्षण वाले लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है जब तक कि उनकी हालत तेज़ी से बिगड़ने की आशंका न हो। इस प्रकार अस्पताल में भर्ती न हुए सभी रोगियों को बीमारी के किसी भी लक्षण की स्थिति में अस्पताल जाने हेतु निर्देश दिया जाना चाहिये।
  • समय पर प्रभावी और सुरक्षित सहायक चिकित्सा सहायता प्राप्त करना ही COVID-19 की महामारी को रोकने का एकमात्र उपाय है।
  • रोगियों और परिवारों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करना और उन्हें यथासंभव जानकारी प्रदान करना आवश्यक है।

COVID-19 क्या है?

  • COVID-19 वायरस मौजूदा समय में भारत समेत दुनिया भर में स्वास्थ्य और जीवन के लिये गंभीर चुनौती बना है। संपूर्ण विश्व में इसका प्रभाव स्पष्ट तौर पर दिखने लगा है।
  • WHO के अनुसार, COVID-19 में CO का तात्पर्य कोरोना से है, जबकि VI विषाणु को, D बीमारी को तथा संख्या 19 वर्ष 2019 (बीमारी के पता चलने का वर्ष ) को चिह्नित करते हैं।
  • कोरोनावायरस (COVID -19) का प्रकोप तब सामने आया जब 31 दिसंबर, 2019 को चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में अज्ञात कारण से निमोनिया के मामलों में हुई अत्यधिक वृद्धि के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को सूचित किया गया।
  • ध्यातव्य है कि इस खतरनाक वायरस के कारण चीन में अब तक हज़ारों लोगों की मृत्यु हो चुकी है और यह वायरस धीरे-धीरे संपूर्ण विश्व में फैल रहा है।

स्रोत: द हिंदू