2019 में वैश्विक स्वास्थ्य को दस खतरे | 25 Jan 2019

चर्चा में क्यों?


हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दस ऐसी बीमारियों की सूची जारी की है जो 2019 के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकती हैं।

प्रमुख बिंदु

  • वर्तमान में हमारी दुनिया स्वास्थ्य संबंधी ढेरों चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें वैक्सीन से ठीक हो सकने वाली बीमारियों जैसे- खसरा और डिप्थीरिया के प्रकोप से लेकर, दवा-प्रतिरोधी बीमारियाँ, मोटापे की बढ़ती दर और पर्यावरण प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन व मानवीय संकटों से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं।
  • इन्हीं खतरों से निपटने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन 2019 में नई पंच वर्षीय रणनीतिक योजना की शुरुआत करने जा रहा है। यहाँ उन 10 स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा की गई है जो 2019 में WHO और अन्य स्वास्थ्य सहयोगियों के लिये चुनौती साबित हो सकती हैं।

दस खतरनाक बीमारियाँ और भारत की तैयारी

  • वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन (Air pollution, climate change)

♦ वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सबसे गंभीर जोखिम हैं। दुनिया भर में 10 में से 9 लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं।
♦ वायु प्रदूषण के कारण विश्व में समय से पहले होने वाली मौतों की तुलना में भारत में लगभग 26% अधिक मौतें होती हैं।

  • गैर - संचारी रोग (Noncommunicable diseases)

♦ दुनिया भर में 70% से अधिक मौतें (41 मिलियन) गैर-संचारी रोगों, जैसे- मधुमेह, कैंसर और हृदय रोग की वज़ह से होती है।
♦ भारत को ‘दुनिया की मधुमेह राजधानी’ के रूप में जाना जाता है। भारत में वर्तमान में अनुमानित कैंसर रोगियों की संख्या आने वाले 20 वर्षों में लगभग दोगुनी हो जाएगी।

  • वैश्विक इन्फ्लूएंजा महामारी (Global influenza pandemic)

♦ WHO का कहना है कि दुनिया को एक और इन्फ्लूएंजा महामारी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, हम नहीं जानते हैं कि यह कब होगी और यह कितनी गंभीर होगी।
♦ 13 जनवरी, 2019 तक भारत में स्वाइन फ्लू के कुल 1,694 मामले सामने आए, जिसमें 49 लोगों की मृत्यु हो गईं। 2018 में कुल 14,992 मामले सामने आए, जबकि कुल 1,103 लोगों की मृत्यु हुईं।

  • नाजुक, सुभेद्य हालत (Fragile, vulnerable settings)

♦ 1.6 बिलियन से अधिक लोग (वैश्विक आबादी का 22%) उन स्थानों पर निवास करते हैं जहाँ सूखे, अकाल, संघर्ष और जनसंख्या विस्थापन तथा खराब स्वास्थ्य सेवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
♦ भारत के कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आए हालिया संकटों ने कामकाज हेतु आंतरिक प्रवास बढ़ा दिया है। यह प्रवासी आबादी अक्सर बुनियादी देखभाल सुविधाओं की कमी का सामना करते हुए अस्वच्छ परिस्थितियों में रहती है।

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR)

♦ एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध करने की बैक्टीरिया, परजीवी, वायरस और कवकों की क्षमता हमारे लिये खतरा है।
♦ दवाओं का प्रतिरोध लोगों और जानवरों में रोगाणुरोधी के अति प्रयोग की वज़ह से होता है, विशेष रूप से खाद्य उत्पादन के लिये उपयोग किया जाता है, साथ ही साथ पर्यावरण में भी।
♦ AMR किसी पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे के बिना बड़े पैमाने पर दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री का भी परिणाम है।
♦ 2016 में एमडीआर-टीबी (मल्टीड्रग-रेज़िस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) की वैश्विक घटनाओं में भारत, चीन और रूस का 47% हिस्सा था। भारत में एक AMR नीति है लेकिन इसका कार्यान्वयन खराब है।

  • खराब प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (Weak primary healthcare)

♦ कई देशों में पर्याप्त प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा नहीं है। यह उपेक्षा निम्न या मध्यम आय वाले देशों में संसाधनों की कमी के कारण हो सकती है और संभवतः पिछले कुछ दशकों में एकल रोग कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण भी।
♦ भारत में आयुष्मान भारत की प्राथमिक देखभाल शाखा पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत का बीमा पहलू) की तुलना में कम ध्यान दिया गया है।
♦ भारत में 2017 के लिये ग्रामीण स्वास्थ्य आँकड़े दिखाते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के लगभग 8,000 पद खाली हैं (लगभग 27,000 की आवश्यकता के मुकाबले) और कुल 25,000 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से लगभग 2000 पर कोई डॉक्टर नहीं हैं।

  • टीका लगवाने में संकोच (Vaccine hesitancy)

♦ टीके की उपलब्धता के बावजूद टीका लगवाने में संकोच वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से निपटने में हुई प्रगति को पलट सकता है।
♦ टीकाकरण प्रति वर्ष 2-3 मिलियन मौतों को रोकता है और यदि टीकाकरण के वैश्विक कवरेज में सुधार किया जाता है, तो आगे 1.5 मिलियन लोगों को बचाया जा सकता है।

  • डेंगू (Dengue)

♦ डेंगू, मच्छर जनित बीमारी है जो फ्लू जैसे लक्षणों का कारण बनती है और घातक होती है। गंभीर डेंगू से पीड़ित 20% लोगों की मृत्यु हो जाती है।
♦ WHO का अनुमान है कि दुनिया की 40% आबादी पर डेंगू खतरा है जिससे प्रति वर्ष लगभग 390 मिलियन लोग संक्रमित होते हैं।
♦ डेंगू भारत के लिये स्थानिक बीमारी है और इससे पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। 25 नवंबर, 2018 तक भारत में 89,974 डेंगू के मामले देखने को मिले, जबकि 144 लोगों की मृत्यु हो गई।

  • HIV

♦ WHO के अनुसार, हर साल HIV/AIDS की वज़ह से लगभग दस लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। इस महामारी की शुरुआत के बाद से 70 मिलियन से अधिक लोग इस संक्रमण के शिकार हुए हैं, जबकि लगभग 35 मिलियन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। आज, दुनिया भर में लगभग 37 मिलियन लोग HIV से ग्रस्त हैं।
♦ भारत ने एक परीक्षण और उपचार नीति शुरू की है, जिसमें HIV का उपचार हर व्यक्ति का अधिकार है। भारत ने HIV/AIDS अधिनियम, 2018 भी लागू किया है जो HIV/AIDS से पीड़ित लोगों को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

  • इबोला, अन्य उच्च खतरे वाले रोगजनक

♦ WHO ने उन बीमारियों और रोगजनकों की पहचान की है जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल पैदा करने की क्षमता है लेकिन उनके प्रभावी उपचार और टीकों की कमी है।
♦ इस सूची में इबोला, ज़ीका, निपा, मध्य-पूर्व श्वसन सिंड्रोम कोरोनावायरस (MERS-CoV) और गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) तथा रोग X शामिल हैं, जो किसी अज्ञात महामारी हेतु तैयार रहने के लिये आगाह करते हैं। ऐसी बीमारियाँ किसी गंभीर महामारी का कारण बन सकती हैं।
♦ भारत में इबोला का कोई मामला देखने को नहीं मिला, लेकिन कई भारतीय राज्यों में 2018 के दौरान ज़ीका का प्रकोप देखा गया और निपा संक्रमण से केरल में कम-से-कम 17 लोगों की मृत्यु हुई।


स्रोत- WHO