स्वच्छ भारत से भूजल संदूषण/प्रदूषण में कमी | 06 Jun 2019

चर्चा में क्यों?

हाल ही में यूनिसेफ़ (United Nations International Children's Emergency Fund- UNICEF) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वच्छ भारत मिशन से भूजल संदूषण/प्रदूषण में कमी आई है।

  • यूनिसेफ द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण, पानी, मिट्टी और खाद्य पर) के पर्यावरणीय प्रभाव’ नामक रिपोर्ट के तहत ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल के खुले में शौच से मुक्त (ODF) और गैर-खुले में शौच से मुक्त (Non-ODF) गाँवों से भूजल के नमूने एकत्र किये गए तथा उनका अध्ययन किया गया।

यूनिसेफ

(United Nations Children's Fund/United Nations International Children's Emergency Fund- UNICEF)

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष-यूनिसेफ (United Nations Children’s Fund) या संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष कहा जाता है।
  • यूनिसेफ का गठन वर्ष 1946 में संयुक्त राष्ट्र के एक अंग के रूप में किया गया था।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा में है। ध्यातव्य है कि वर्तमान में 190 देश इसके सदस्य हैं।
  • वस्तुतः इसका गठन द्वितीय विश्वयुद्ध से प्रभावित हुए बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने तथा उन तक खाना और दवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था।

अध्ययन के परिणाम

  • रिपोर्ट के अनुसार, गैर-खुले में शौच मुक्त नॉन-ओपन (Non-Open Defecation Free) गाँव की तुलना में ओपन डेफिकेशन फ्री/खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free-ODF) गाँवों में भूजल 12.7 गुना कम दूषित पाया गया है।
  • इसके अलावा ओपन डेफिकेशन फ्री गाँवों की अपेक्षा नॉन-ओपन डेफिकेशन फ्री गाँवों की मिट्टी में 1.13%, खाने-पीने की वस्तुओं में 1.48% और पीने के पानी में 2.68% अधिक प्रदूषण के तत्त्व सामने आए हैं।
  • अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छ भारत मिशन के सफाई एवं स्वच्छता कार्यों को बढ़ावा देने, नियमित निगरानी और व्यवहार में परिवर्तन के लिये जागरूकता कार्यक्रमों के संचालन जैसे कार्यों से पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में सफलता प्राप्त हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन का महत्त्व

Significance of Swachh Bharat Mission

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित डालबर्ग द्वारा संचालित किया गया है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन पर किये गए अध्ययन में पाया गया है कि 100% ODF हासिल करने के बाद सालाना लगभग 3 लाख लोगों की जान को बचाया जा सकता है।
  • समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों जैसे- सरकारी अधिकारियों से लेकर सेना के जवानों, बॉलीवुड अभिनेताओं से लेकर खिलाड़ियों, उद्योगपतियों से लेकर आध्यात्मिक नेताओं आदि, ने इस दिशा में आगे बढ़कर सहयोग प्रदान किया हैं। साथ ही स्वच्छता के इस जन आंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की हैं।
  • वर्ष 2014 में इस मिशन के शुरू होने से पहले ग्रामीण स्वच्छता का क्षेत्र लगभग 38.70% था, ऐसे में यह रिपोर्ट देश की एक महत्त्वपूर्ण एवं प्रभावी स्थिति को इंगित करती है।

चुनौतियाँ

  • खुले में शौच से मुक्त की स्थिति को स्थाई रूप से बनाने के लिये ODF स्थिति प्राप्त होने के बाद कम-से-कम एक साल तक निगरानी और स्पॉट चेकिंग (Spot-Checking) की आवश्यकता है।
  • स्वयंसेवकों को स्वच्छता की स्थिति की जाँच करने के लिये प्रेरित करना और उन्हें अच्छे प्रोत्साहन की पेशकश करने पर ध्यान दिया जाना चाहिये।
  • समाज के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिये एक प्रशिक्षित कार्यबल की आवश्यकता है जो सफाई के प्रति समुदायों को ज़्यादा-से-ज़्यादा जागरूक कर सकें।
  • सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिये सतही स्तर पर कार्य करने पर बल देना चाहिये।
  • एक अन्य समस्या सड़क गलियारों के साथ ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में खुले तालाबों (पानी के पूल) की उपस्थिति है। तालाबों को विभिन्न प्रयोजनों के लिये लोगों एवं पशुधन द्वारा उपयोग किया जाता है। तालाबों में पानी की खराब गुणवत्ता विभिन्न बीमारियों को जन्म देती है। अतः इस संदर्भ में विशेष रूप से ध्यान दिये जाने की ज़रूरत है।
  • हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध के बावजूद, यह देश के विभिन्न स्थानों में अभी भी जारी है, अनौपचारिक आँकड़ों के अनुसार अभी भी देश में तकरीबन 13 लाख मेहतर हैं जबकि आधिकारिक आँकड़े लगभग दो लाख की गिनती को ही इसमें शामिल करते हैं।
  • हालाँकि प्रौद्योगिकी इस संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सीवर में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति काफी खतरनाक एवं जानलेवा होती है। प्रत्येक वर्ष लगभग 22,000 श्रमिकों की मौत सीवर की सफाई करते समय होती हैं। स्पष्ट रूप से इस संदर्भ में आवश्यक कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है।

स्रोत- PIB