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भूमि अधिग्रहण पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश | 07 Mar 2020 | भारतीय राजनीति

प्रीलिम्स के लिये:

भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013

मेन्स के लिये:

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और इसके मुआवज़े से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और इसके मुआवज़े के संदर्भ में वर्ष 2018 के अपने एक पूर्व निर्णय को पुनर्स्थापित करते हुए यह स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिये दिये जाने वाले मुआवज़े के राजकोष (Treasury) में जमा होने के बाद भूमि अधिग्रहण को अवैध नहीं माना जाएगा।

मुख्य बिंदु:

भूमि अधिग्रहण क्या है?

भूमि अधिग्रहण से आशय (भूमि खरीद की) उस प्रक्रिया से है, जिसके तहत केंद्र या राज्य सरकार सार्वजनिक हित से प्रेरित होकर क्षेत्र के बुनियादी विकास, औद्योगीकरण या अन्य गतिविधियों के लिये नियमानुसार नागरिकों की निजी संपत्ति का अधिग्रहण करती हैं। इसके साथ ही इस प्रक्रिया में प्रभावित लोगों को उनके भूमि के मूल्य के साथ ही उनके पुनर्वास के लिये मुआवज़ा प्रदान किया जाता है।

भूमि अधिग्रहण के कानूनी प्रावधान:

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013:

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के लाभ:

निष्कर्ष: भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 में भूमि अधिग्रहण से लेकर मुआवज़े तक की प्रक्रिया में स्पष्टता के अभाव में यह अधिनियम वर्षों से भू-मालिकों और सरकार के बीच तनाव का एक कारण बना रहा। भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के माध्यम से जहाँ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने में सफलता प्राप्त हुई थी, वहीं सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद अधिनियम की धारा 24(2) की व्याख्या के संदर्भ में व्याप्त मतभेद दूर करने में सहायता प्राप्त होगी, जिससे देश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों का निस्तारण किया जा सकेगा।

स्रोत: द हिंदू