वाहन निर्माण में ‘अर्द्धचालक चिप’ की कमी | 26 May 2021

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में उपकरणों, विशेष रूप से अर्द्धचालक चिप की असामान्य कमी ने भारत-आधारित वाहन निर्माण (कार निर्माण और प्रीमियम बाइक) की सभी श्रेणियों में उत्पादन को कम कर दिया है।

प्रमुख बिंदु:

अर्द्धचालक चिप:

  • अर्द्धचालक चिपएक ऐसी सामग्री है जिसमें सुचालक (आमतौर पर धातु) और कुचालक या ऊष्मारोधी (जैसे- अधिकांश सिरेमिक) के बीच चालन की क्षमता होती है। अर्द्धचालक शुद्ध तत्व हो सकते हैं, जैसे सिलिकॉन या जर्मेनियम, या यौगिक जैसे गैलियम आर्सेनाइड या कैडमियम सेलेनाइड।
    • चालकता उस आदर्श स्थिति की माप है जिस पर विद्युत आवेश या ऊष्मा किसी सामग्री से होकर गुज़र सकती है।

Semiconductor-Chips

  • सेमीकंडक्टर चिप एक विद्युत परिपथ है, जिसमें कई घटक होते हैं जैसे कि- ट्रांज़िस्टर और अर्द्धचालक वेफर पर बनने वाली वायरिंग। इन घटकों में से कई से युक्त एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को एकीकृत सर्किट (IC) कहा जाता है और इसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, उपकरण, गेमिंग हार्डवेयर और चिकित्सा उपकरण जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पाया जा सकता है।
    • इन उपकरणों को लगभग सभी उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, खासकर ऑटोमोबाइल उद्योग में।
  • इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और कलपुर्जे आज एक नई आंतरिक दहन इंजन कार की कुल लागत का 40% हिस्सा हैं, जो कि दो दशक पहले 20% से भी कम था।
    • अर्द्धचालक चिप का इस वृद्धि में एक बड़ा हिस्सा है।

कमी का कारण:

  • कोविड और लॉकडाउन:
    • कोविड -19 महामारी और दुनिया भर में उसके बाद लॉकडाउन ने जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका सहित अन्य देशों में महत्त्वपूर्ण चिप बनाने वाली सुविधाओं को बंद कर दिया।
    • इसकी कमी व्यापक प्रभाव का कारण बन सकती है, क्योंकि मांग में कमी आती इसकी अनुवर्ती कमी का कारण बन सकती है।
  • बढ़ी हुई खपत:
    • आईसी चिप में लगे ट्रांज़िस्टर की संख्या हर दो वर्ष में दोगुनी हो गई है। विशेष रूप से पिछले एक दशक में चिप की खपत में वृद्धि आंशिक रूप से कार निर्माण सामग्री में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के बढ़ते योगदान के कारण भी है।

प्रभाव:

  • कम आपूर्ति:
    • अर्द्धचालक चिप के उपभोक्ता, जो मुख्य रूप से कार निर्माता और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता हैं, को उत्पादन जारी रखने के लिये इस महत्त्वपूर्ण इनपुट की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल रही है।
      • चिप की कमी को रिकॉर्ड टाइम में मापा जाता है, जो कि चिप के ऑर्डर करने और डिलीवर होने के बीच का अंतर है।
  • ऑटोमोबाइल का कम उत्पादन:
    • समय पर डिलीवरी के साथ कार निर्माता आमतौर पर कम इन्वेंट्री होल्डिंग रखते हैं और मांग के अनुसार उत्पादन हेतु इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की आपूर्ति शृंखला पर निर्भर रहते हैं।
  • विलंबित आपूर्ति और कम सुविधाएँ:
    • इससे वाहन उत्पादन में कमी आई है कुछ कंपनियों ने चिप की कमी से निपटने के लिये अस्थायी आधार पर सुविधाओं और उच्च इलेक्ट्रॉनिक क्षमताओं को छोड़ना शुरू कर दिया है।

आगे की राह:

  • ऑटोमोबाइल उद्योग में वर्तमान मंदी एक अस्थायी चरण प्रतीत होता है। टीकाकरण अभियान और आर्थिक सुधार एक बहुत ही आवश्यक उत्प्रेरण प्रदान करेगा।
  • हालाँकि कम-से-कम कुछ समय के लिये एंट्री लेवल कारों और टू व्हीलर पर ‘गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स’ (GST) को कम करने की ज़रूरत है। राज्य सरकारों को भी पथ कर कम करने की आवश्यकता है।

स्रोत-इंडियन एक्सप्रेस