मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट 2022-23 | 05 May 2023

प्रिलिम्स के लिये:

आरबीआई की मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट, शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य

मेन्स के लिये:

वृद्धि और विकास, भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य एवं वित्तीय क्षेत्र की भूमिका

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा एवं वित्त पर अपनी रिपोर्ट 2022-23 में किये गए एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन हेतु भारत के अनुकूलन के लिये कुल संचयी व्यय वर्ष 2030 तक 85.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है।

मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट:

  • परिचय:
    • यह RBI का वार्षिक प्रकाशन है।
    • रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
  • थीम:
    • मुद्रा और वित्त पर रिपोर्ट 2022-23 का विषय 'टुवर्ड्स ए ग्रीनर क्लीनर इंडिया' है।
      • यह भारत के लिये जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और अवसरों एवं कम कार्बन तथा जलवायु-लचीले विकास पथ को प्राप्त करने में वित्तीय क्षेत्र की भूमिका पर केंद्रित है।
  • लक्ष्य:
    • इसका उद्देश्य भारत में व्यापक आर्थिक और वित्तीय विकास तथा उनके नीतिगत प्रभावों पर विश्लेषणात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान करना है।
  • आकलन:
    • रिपोर्ट में भारत में टिकाऊ उच्च विकास के लिये भविष्य की चुनौतियों का आकलन करने हेतु जलवायु परिवर्तन के चार प्रमुख आयाम- जलवायु परिवर्तन के अभूतपूर्व पैमाने और गति, इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव, वित्तीय स्थिरता के निहितार्थ एवं जलवायु जोखिमों को कम करने के लिये नीतिगत विकल्प शामिल हैं।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ:

  • अक्षय ऊर्जा लक्ष्य:
    • भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट का सुझाव है कि वर्ष 2070-71 तक भारत के कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की भागीदारी 80 प्रतिशत तक होनी चाहिये।
    • इसके लिये ऊर्जा उत्सर्जन में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 5 प्रतिशत सालाना की त्त्वरित कमी की आवश्यकता होगी।
  • हरित वित्तपोषण की आवश्यकता:
    • जलवायु घटनाओं के कारण होने वाले बुनियादी ढाँचे के अंतर को दूर करने के लिये भारत का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2030 तक हरित वित्तपोषण आवश्यकता हेतु सालाना कम-से-कम 2.5 प्रतिशत होने का अनुमान है।
      • वित्तीय प्रणाली को भारत के शुद्ध शून्य लक्ष्य में प्रभावी ढंग से योगदान करने के लिये पर्याप्त संसाधन जुटाने और मौजूदा संसाधनों को पुनः आवंटित करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • नीतिगत हस्तक्षेप:
    • इस रिपोर्ट में सभी नीति लीवर्स (सार्वजनिक सेवाओं में परिवर्तनों को निर्देशित, प्रबंधित करने और आकार देने के लिये सरकार एवं उसके अभिकरणों द्वारा उपयोग में लाया जाना वाला उपकरण) में प्रगति सुनिश्चित करने के लिये एक संतुलित नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है जो भारत को वर्ष 2030 तक अपने हरित संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने और वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण वित्तीय जोखिम:
    • भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में जलवायु संबंधी वित्तीय जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
  • नीति उपकरण:
    • केंद्रीय बैंकों के पास निवेश के निर्णयों को प्रभावित करने और स्थिरता लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये संसाधनों एवं ऋण के आवंटन के लिये कई नीतिगत साधन हैं।
    • इसमें विभिन्न नियमों के माध्यम से बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को जलवायु एवं पर्यावरणीय जोखिमों पर विचार करना शामिल है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
  2. भारत के संविधान में कुछ प्रावधान केंद्र सरकार को जनहित में RBI को निर्देश जारी करने का अधिकार देते हैं।
  3. RBI का गवर्नर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम से अपनी शक्ति प्राप्त करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

व्याख्या:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हुई थी।
  • मूलतः रिज़र्व बैंक निजी स्वामित्त्व में था, लेकिन वर्ष 1949 में राष्ट्रीयकृत होने के बाद से यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्त्व में है।
  • RBI के मामले एक केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा शासित होते हैं। बोर्ड की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अनुसार की जाती है।

स्रोत : द हिंदू