निर्यात-आयात बैंक के पुनर्पूंजीकरण को स्वीकृति | 17 Jan 2019

चर्चा में क्यों?


प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Export Import Bank of India-Exim Bank) के पुनर्पूंजीकरण को मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय निर्यात-आयात बैंक में पूंजी लगाने के लिये भारत सरकार 6,000 करोड़ रुपए के पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड (Recapitalization Bonds) जारी करेगी।
  • एक्ज़िम बैंक का पुनर्पूंजीकरण दो चरणों में किया जाएगा जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4,500 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,500 करोड़ रुपए की पूंजी लगाई जाएगी।
  • कैबिनेट ने एक्ज़िम बैंक की अधिकृत पूंजी को 10,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की मंज़ूरी दे दी है। पुनर्पूंजीकरण बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किये जाएंगे।

प्रमुख प्रभावः

  • एक्ज़िम बैंक भारत के लिये प्रमुख निर्यात ऋण एजेंसी है। एक्ज़िम बैंक में पूंजी लगाने से यह पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाने सहित ज़्यादा क्षमता के साथ भारतीय निर्यात के लिये आवश्यक सहायता देने में समर्थ हो जाएगा।
  • पुनर्पूंजीकरण से भारतीय कपड़ा उद्योगों को आवश्यक सहायता देने, रियायती वित्त योजना (Concessional Finance Scheme-CFS) में संभावित बदलावों, भारत की सक्रिय विदेश नीति और रणनीतिक मंशा को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिये ऋण की नई रूपरेखा की संभावनाओं जैसी पहलों को बढ़ावा मिलेगा।

एक्ज़िम बैंक (EXIM Bank)

  • एक्ज़िम बैंक ऑफ इंडिया (एक्ज़िम बैंक) की स्थापना एक संसदीय अधिनियम (Act of Parliament) के तहत वर्ष 1982 में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिये शीर्ष वित्तीय संस्थान के रूप में की गई थी।
  • यह बैंक मुख्यतः भारत से किये जाने वाले निर्यात के लिये ऋण उपलब्ध कराता है।
  • भारत के विकासात्मक एवं बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं, उपकरणों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिये विदेशी खरीदारों और भारतीय आपूर्तिकर्त्ताओं को आवश्यक सहायता देना भी इसमें शामिल है।
  • इसका नियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है।

स्रोत : पी.आई.बी