RBI की मौद्रिक नीति 2021 | 08 Feb 2021

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने कोविड महामारी के प्रभाव के कारण वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर वर्ष 2021-22 में 10.5% रहने का अनुमान लगाया है।

  • आरबीआई ने पहले ही अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy Report) रिपोर्ट में कोविड-19 प्रेरित आर्थिक संकट से निपटने के लिये कई उपाय पेश किये थे।

प्रमुख बिंदु

जीडीपी का पूर्वानुमान:

  • केंद्रीय बैंक के अनुसार, वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 10.5 प्रतिशत (पहली छमाही में 26.2 से 8.3 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 6.0 प्रतिशत) रहने का अनुमान है।
    • सकल घरेलू उत्पाद में लॉकडाउन और उद्योगों के बंद होने के कारण वर्ष 2020-21 की जून तिमाही में 23.9% की गिरावट और सितंबर तिमाही में 7.5% की गिरावट आई थी।
    • रियल जीडीपी आर्थिक उत्पादन का एक पैमाना है जो मुद्रास्फीति या अपस्फीति के प्रभावों का लेखा-जोखा रखता है।
      • नॉमिनल जीडीपी: यह चालू कीमतों (वर्तमान वर्ष की प्रचलित कीमत) में व्यक्त सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है।
      • वास्तविक जीडीपी: नॉमिनल GDP के विपरीत यह किसी आधार वर्ष की कीमतों पर व्यक्त की गई सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को बताता है।

सकारात्मक दृष्टिकोण का कारण:

  • कृषि क्षेत्र की अच्छी संभावनाओं पर ग्रामीण मांग के निर्भर रहने की संभावना है।
  • कोविड-19 के मामलों में गिरावट तथा टीकाकरण के प्रसार से संपर्क-गहन (Contact-Intensive) सेवाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
  • उपभोक्ता के प्रति पुनः विश्वास देखा जा रहा है और विनिर्माण क्षेत्र में सेवाओं तथा बुनियादी ढाँचे को लेकर उम्मीदें अभी भी बरकरार हैं।
  • सार्वजनिक निवेश में आत्मनिर्भर 2.0 और सरकार की 3.0 योजनाओं के तहत राजकोषीय प्रोत्साहन में तेज़ी आएगी।
  • केंद्रीय बजट 2021-22 का उद्देश्य स्वास्थ्य और कल्याण, बुनियादी ढाँचा, नवाचार तथा अनुसंधान आदि जैसे क्षेत्रों पर ज़ोर देने के साथ ही विकास की गति को तेज़ करना है।

अपरिवर्तित नीति दरें:

  • RBI ने रेपो दर (Repo Rate) में चलनिधि समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility- LAF) के तहत कोई बदलाव नहीं किया है, यह 4% पर बरकरार है।
  • रिवर्स रेपो दर, एलएएफ के तहत 3.35% और सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility- MSF) दर तथा बैंक दर (Bank Rate) 4.25% पर अपरिवर्तित बनी हुई है।

अन्य निर्णय:

  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR):
    • RBI ने मई 2021 तक CRR को गैर-विघटनकारी तरीके से दो चरणों में 3% से 4% तक बहाल करने का निर्णय लिया है।
  • सरकारी प्रतिभूतियों में प्रत्यक्ष खुदरा निवेश:
    • आरबीआई ने छोटे निवेशकों को सरकारी प्रतिभूति प्लेटफॉर्म पर सीधे पहुँच प्रदान करने हेतु अनुमति देने का प्रस्ताव पेश किया है।
      •  सरकारी प्रतिभूति, केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाने वाला एक पारंपरिक साधन है और इसे निवेश का सबसे सुरक्षित रूप माना जाता है।

उदार रुख:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee- MPC) ने भी विकास को पुनर्जीवित और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिये जब तक आवश्यक हो, उदार रुख अपनाने का फैसला लिया है।
  • यह फैसला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) मुद्रास्‍फीति के 4% के मध्‍यावधिक लक्ष्‍य को +/-2 प्रतिशत के दायरे में हासिल करने के उद्देश्‍य से भी है।
    • सीपीआई खाद्य, चिकित्सा देखभाल, शिक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि जैसी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में अंतर की गणना करता है, जिन्हें  भारतीय उपभोक्ता अपने उपयोग के लिये खरीदते हैं।
    • सीपीआई में खाद्य और पेय पदार्थ, ईंधन तथा प्रकाश, आवास एवं कपड़े, बिस्तर व जूते सहित कई उप-समूह हैं।

मौद्रिक नीति समिति

समिति के विषय में:

  • RBI की ‘मौद्रिक नीति समिति’ ‘भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934’ के तहत स्थापित एक संविधिक निकाय है। यह आर्थिक विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुद्रा स्थिरता को बनाए रखने हेतु कार्य करती है।

संरचना:

  • मौद्रिक नीति समिति भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है जिसका गठन ब्याज दर निर्धारण को अधिक उपयोगी एवं पारदर्शी बनाने के लिये 27 जून, 2016 को किया गया था।

अध्यक्ष:

  • रिज़र्व बैंक का गवर्नर इस समिति का पदेन अध्यक्ष होता है।

सदस्य:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से तीन सदस्य RBI से होते हैं और अन्य तीन सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय बैंक द्वारा की जाती है।

निर्णय:

इस समिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिये जाते हैं और समान मतों की स्थिति में रिज़र्व बैंक का गवर्नर अपना निर्णायक मत देता है।

कार्य-प्रणाली:

  • यह महँगाई दर (4%) को प्राप्त करने के लिये रेपो रेट के निर्धारण का कार्य करती है।

प्रमुख शब्द

रेपो और रिवर्स रेपो दर:

  • रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से ऋण लेते हैं। रेपो दर में कटौती कर RBI बैंकों को यह संदेश देता है कि उन्हें आम लोगों और कंपनियों के लिये ऋण की दरों को आसान करना चाहिये।
  • रिवर्स रेपो दर रेपो रेट के ठीक विपरीत होती है अर्थात् बैंक अपनी कुछ धनराशि को रिज़र्व बैंक में जमा कर देते हैं जिस पर रिज़र्व बैंक उन्हें ब्याज देता है। रिज़र्व बैंक जिस दर पर ब्याज देता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।

तरलता समायोजन सुविधा:

  • तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility- LAF) भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के तहत प्रयोग किया जाने वाला उपकरण है जो बैंकों को पुनर्खरीद समझौतों, रेपो एग्रीमेंट के माध्यम से ऋण प्राप्त करने या रिवर्स रेपो एग्रीमेंट के माध्यम से RBI को ऋण प्रदान करने की अनुमति प्रदान करता है।

बैंक दर:

  • जिस सामान्य ब्याज दर पर रिज़र्व बैंक द्वारा अन्य बैंकों को पैसा उधार दिया जाता है, उसे बैंक दर कहते हैं। इसके द्वारा रिज़र्व बैंक साख नियंत्रण (Credit Control) का काम करता है।

सीमांत स्थायी सुविधा:

  • सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility- MSF) के तहत बैंक अंतर-बैंक तरलता (Inter-Bank Liquidity) की कमी को पूरा करने के लिये आपातकालीन स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं।
    • बैंक इंटरबैंक उधार के तहत एक निर्दिष्ट अवधि के लिये एक-दूसरे को धन उधार देते हैं।

नकद आरक्षित अनुपात (CRR):

  • प्रत्येक बैंक को अपने कुल कैश रिज़र्व का एक निश्चित हिस्सा रिज़र्व बैंक के पास रखना होता है, जिसे नकद आरक्षित अनुपात कहा जाता है। ऐसा इसलिये किया जाता है जिससे किसी भी समय किसी भी बैंक में बहुत बड़ी तादाद में जमाकर्त्ताओं को यदि रकम निकालने की ज़रूरत महसूस हो तो बैंक को पैसा चुकाने में दिक्कत न आए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस