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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 10 जुलाई, 2020 | 10 Jul 2020 | विविध

जम्मू-कश्मीर में छह पुलों का ई-उद्घाटन

जम्मू-कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा (LOC) के निकट स्थित संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों एवं पुलों की कनेक्टिविटी में एक नई क्रांति का सूत्रपात करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 6 प्रमुख पुलों को राष्ट्र को समर्पित किया है। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण इन सभी पुलों का निर्माण कार्य सीमा सड़क संगठन (Border Road Organization-BRO) द्वारा रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। इन 6 पुलों में से जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में तरनाह नाले पर दो पुल, जबकि जम्मू ज़िले में अखनूर-पल्लनवाला रोड पर कुल चार पुलों का निर्माण किया गया है, जो कि 30 से 300 मीटर तक फैले हुए हैं।  सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इन सभी पुलों का निर्माण कुल 43 करोड़ रुपए की लागत से किया है। BRO के ‘प्रोजेक्ट संपर्क’ (Project Sampark) के तहत निर्मित इन पुलों से सशस्त्र बलों को सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में आवाजाही करने में काफी सुविधा होगी। साथ ही यह पुल दूरस्‍थ सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देंगे। सीमा सड़क संगठन (BRO) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख सड़क निर्माण एजेंसी है। इसकी स्थापना 07 मई, 1960 को की गई थी। यह संगठन सीमा क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। गौरतलब है कि सीमा सड़क संगठन ने भूटान, म्याँमार, अफगानिस्तान आदि मित्र देशों में भी सड़कों का निर्माण किया है।

भुवनेश्वर लैंड यूज़ इंटेलिजेंस सिस्टम (BLUIS)

हाल ही में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर में सभी सरकारी ज़मीनों के अतिक्रमण की निगरानी के लिये ‘भुवनेश्वर लैंड यूज़ इंटेलिजेंस सिस्टम’ (Bhubaneshwar Land Use Intelligence System-BLUIS) लॉन्च किया है। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, BLUIS के शुभारंभ के साथ, ओडिशा देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence-AI) और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का दोहन किया है। गौरतलब है कि सरकारी भूमि में अतिक्रमणों का पता लगाने के लिये दशकों से जिस प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है, उसमें पर्याप्त पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है, जिसके कारणवश ओडिशा की यह प्रणाली काफी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। यह प्रणाली राज्य सरकार को भूमि उपयोग में होने वाले बदलावों के बारे में सूचित करेगी। इस प्रणाली का उपयोग क्षेत्र के निवासियों द्वारा सार्वजनिक भूमि पर होने वाले किसी भी अनधिकृत कार्य की रिपोर्ट करने के लिये किया जाएगा। राज्य सरकार के मुताबिक भुवनेश्वर, भारत में सबसे तेज़ी से विकसित शहरों में से एक है, जो दैनिक आधार पर भूमि उपयोग में परिवर्तन महसूस कर रहा है, और इस प्रक्रिया में सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण का शिकार हो रही है। 

जयंत कृष्णा

यूके इंडिया बिज़नेस काउंसिल (UK India Business Council-UKIBC) ने जयंत कृष्णा को समूह का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। गौरतलब है कि जयंत कृष्णा यूके इंडिया बिज़नेस काउंसिल (UKIBC) के पहले भारतीय CEO होंगे। इससे पूर्व जयंत कृष्णा, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation) के कार्यकारी निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। जयंत कृष्णा लगभग 2 दशकों तक टाटा समूह के साथ भी जुड़े रहे हैं। जयंत कृष्णा यूके इंडिया बिज़नेस काउंसिल (UKIBC) के वर्तमान CEO रिचर्ड हेडल (Richard Heald) का स्थान लेंगे। यूके-इंडिया बिज़नेस काउंसिल (UKIBC) एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो कि भारत में व्यावसायिक सफलता प्राप्त करने के लिये आवश्यक अंतर्दृष्टि, नेटवर्क और सुविधाओं के संबंध में ब्रिटेन के व्यवसायों को सहायता प्रदान करती है। 

अमेज़ोनिया -1 (Amazonia -1)

ब्राज़ील द्वारा विकसित अमेज़ोनिया -1 (Amazonia -1) पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research and Research Organisation-ISRO) द्वारा अगले माह लॉन्च किया जाएगा। ISRO द्वारा ब्राज़ील के इस उपग्रह को PSLV के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। अमेज़ोनिया-1 उपग्रह को ब्राज़ील द्वारा स्थानीय स्तर पर डिज़ाइन किया गया है और इसका परीक्षण भी ब्राज़ील द्वारा ही किया गया है। ब्राज़ील के इस उपग्रह से अमेज़न वन में वृक्षों की कटाई की निगरानी करने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों अमेज़न वन में लगी आग के कारण यह उपग्रह और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है। भारत और ब्राज़ील के बीच अंतरिक्ष सहयोग का आरंभ 2000 के दशक की शुरुआत में हुआ था जब दोनों की सरकारों के बीच इस संबंध में एक समझौता किया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी, यह भारत सरकार की अंतरिक्ष एजेंसी है और इसका मुख्यालय बंगलुरू में है। स्थापना के पश्चात् भारत के लिये इसरो ने कई कार्यक्रमों एवं अनुसंधानों को सफल बनाया है। इसने न सिर्फ भारत के कल्याण के लिये बल्कि भारत को विश्व के समक्ष सॉफ्ट पॉवर के रूप में स्थापित करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।