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लड़ाकू विमान: राफेल | 31 Jul 2020 | आंतरिक सुरक्षा

प्रीलिम्स के लिये:

राफेल लड़ाकू विमान, सुखोई-30

मेन्स के लिये:

राफेल की विशेषताएँ और भारत के लिये सुरक्षा दृष्टि से इसका महत्त्व, भारतीय वायु सेना के समक्ष मौजूद चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 7000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पाँच राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jets) फ्रांँस से हरियाणा स्थित अंबाला एयर बेस (Ambala Air Base) पहुँचे हैं।

प्रमुख बिंदु:

फ्राँस के साथ अंतर-सरकारी समझौता:

क्या खास है राफेल में?

अन्य विशेषताएँ:

  • विदित हो कि राफेल 2,222.6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 50,000 फीट की ऊँचाई तक उड़ सकता है।
  • इस लड़ाकू विमान की रेंज तकरीबन 3,700 किलोमीटर है यानी यह एक बार में लगभग 3,700 किलोमीटर तक बढ़ सकता है, हालाँकि इस रेंज को मिड-एयर रीफ्यूलिंग (Mid-Air Refuelling) के साथ बढ़ाया जा सकता है।
  • यह लड़ाकू विमान लगभग 15.27 मीटर लंबा है और यह अपने साथ एक बार में 9,500 किलोग्राम बम और गोला-बारूद ले जा सकता है।

भारत के लिये इसका महत्त्व

संबंधित चिंताएँ:

निष्कर्ष:

गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमान भारत की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण हैं और इनमें भारत के रक्षा क्षेत्र को भी बढ़ावा देने की क्षमता मौजूद है, अतः आवश्यक है कि भारत और फ्रांँस के बीच रक्षा क्षेत्र से संबंधित निरंतर संवाद के लिये एक तंत्र स्थापित किया जाए और सामरिक संबंधों को मज़बूत करने के साथ-साथ रक्षा संबंधों को मज़बूत करने पर भी ध्यान दिया जाए। इसके अलावा भारत सरकार और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भारतीय वायु सेना समेत भारत की तीनों सेनाओं के समक्ष मौजूद चुनौतियों को जल्द-से-जल्द हल करने का प्रयास करना चाहिये, ताकि भारतीय सेनाओं को और मज़बूत बनाया जा सके और सेना में कार्यरत जवानों को प्रोत्साहन मिल सके।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस