सेशल्स में भारतीय नेवल बेस की संभावना पर प्रश्नचिह्न | 31 Mar 2018

चर्चा में क्यों?
मार्च 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री की सेशल्स यात्रा के दौरान अज़म्पशन द्वीप (Assumption Island) पर पहला भारतीय नेवल बेस स्थापित और विकसित करने संबंधी समझौता हुआ था। किंतु हाल ही में सेशल्स के राष्ट्रपति ने अपनी संसद में यह जानकारी दी है कि भारत के साथ अज़म्पशन द्वीप के अवसरंचनात्मक विकास संबंधी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इससे सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण अवस्थिति वाले इस हिंद महासागरीय द्वीप में अपना फुटप्रिंट बढ़ाने के भारतीय प्रयासों को झटका लगा है।

अज़म्पशन द्वीप भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • रणनीतिक अवस्थिति वाले द्वीप पर भारत की सैन्य उपस्थिति होने से दक्षिणी हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज़ों और कंटेनरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • इस सैन्य बेस से भारतीय नौसेना को मोज़ाम्बिक चैनल की निगरानी करने और किसी भी तरह की समुद्री डकैती के प्रयासों को विफल करने की सुविधा मिलती क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र के माध्यम से संचालित होता है।
  • इससे अन्य देशों को भी नौ-वहन सुविधाएँ प्रदान कराई जा सकेंगी। इस द्वीप से प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और खाड़ी क्षेत्र के बीच के मुख्य ऊर्जा मार्ग (Energy Route) की चौकसी की जा सकती है।
  • इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा घेरे को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

परियोजना को आगे बढाने में समस्याएँ

  • भारत-सेशल्स के बीच हस्ताक्षर होने के बाद से ही इस समझौते का कई स्थानीय मुद्दों के चलते विरोध किया जाता रहा है। 
  • इस समझौते को लागू करने के लिये सेशल्स की नेशनल असेंबली की सहमति आवश्यक है किंतु वहाँ के प्रमुख विपक्षी नेता द्वारा इसका विरोध करने के कारण इसके क्रियान्वयन पर संदेह बना हुआ है।
  • इस समझौते के विरोध के लिये कई कारणों का हवाला दिया जा रहा है।
  • पहला कारण तो यही है कि स्थानीय लोगों को आंशका है, छोटे द्वीपीय राष्ट्र में भारत की उपस्थिति और श्रमिकों के अंत:प्रवाह से भारतीय सेशल्स की अर्थव्यवस्था पर हावी हो जाएंगे जिससे स्थानीय लोगों के रोज़गार प्रभावित होंगे।
  • कई स्थानीय NGOs और स्थानीय लोग अपने देश में विदेशी शक्ति की सैन्य उपस्थिति को अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय गरिमा पर हमला तथा अतिक्रमण के रूप में देखते हैं।
  • सेशल्स में इस समझौते से संबंधित विभिन्न हितधारक भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय प्रतिद्वंदिता से अपने क्षेत्र को बचाना चाहते हैं। सेशल्स अभी तक दोनों देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखने में सफल रहा है और संघर्ष की स्थिति में किसी एक पक्ष को चुनने की स्थिति में नहीं होना चाहते।
  • इस समझौते से कुछ पर्यावरणीय चिंताएँ भी जुड़ी हुई हैं। इस समझौते के आलोचकों के अनुसार विशालकाय कछुओं (Giant Tortoises) की सर्वाधिक आबादी का आवास स्थल अल्दाब्रा कोरल एटोल (Aldabra Atoll) जो कि एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है, अज़म्पशन द्वीप के बहुत निकट स्थित है।

निष्कर्ष 

पहली बार किये गए समझौते में सेशल्स सरकार की आंशकाओं को दूर करने के लिये जनवरी 2018 में एक संशोधित समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। हालाँकि इस प्रोजेक्ट का वित्तीयन भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है किंतु भारत के युद्ध में संग्लन होने, महामारी जैसी कुछ निश्चित परिस्थितियों में सेशल्स इस सैन्य अड्डे की फंक्शनिंग को निलंबित कर सकता है। यह परियोजना भारत और सेशल्स दोनों के ही हितों और लाभों की सुरक्षा में सक्षम है क्योंकि इससे IOR में निगरानी और सुरक्षित आवाजाही में वृद्धि होगी।