डेली अपडेट्स

प्रीलिम्स फैक्ट्स : 30 जून | 30 Jun 2018 | प्रारंभिक परीक्षा

चुनावी बॉण्‍ड योजना, 2018

हाल ही में भारत सरकार ने चुनावी बॉण्ड योजना, 2018 को अधिसूचित किया है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉण्‍ड की खरीद ऐसे व्‍यक्ति/संस्था द्वारा की जा सकती है, जो भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्‍थापित हो।

उल्लेखनीय है कि चुनावी बॉण्‍ड जारी करने की तारीख से 15 दिनों के लिये वैध होंगे। वैधता की अवधि समाप्त होने के बाद जमा किये गए चुनावी बॉण्‍डों पर राजनीतिक दल को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। राजनीतिक दल द्वारा जमा किये गए चुनावी बॉण्‍डों की राशि को उसी दिन उनके बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा। 

हायाबुसा 2

जापानी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी ने जीवन की उत्पत्ति के रहस्य से पर्दा उठाने हेतु जानकारी एकत्रित करने के लिये दिसंबर 2014 में हायाबुसा-2 नामक एक अभियान लॉन्च किया था, जो कि साढ़े तीन साल की यात्रा के बाद पृथ्वी से 30 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित क्षुद्रग्रह ‘रायगु’ (वैज्ञानिक नाम 162173 JU3) पर पहुँच गया है। इस अभियान का संचालन छह वर्षों के लिये किया जाएगा। इसका नाम फाल्कन पक्षी के नाम पर रखा गया है जिसे जापानी भाषा में हायाबुसा कहा जाता है।

हायाबुसा - 2 की विशेषताएँ

पृष्ठभूमि

Re unite एप

केंद्रीय वाणिज्य एंव उद्योग मंत्रालय ने ‘रीयूनाइट’ (Re unite) नामक एक मोबाइल एप लॉन्च किया है। इस एप की सहायता से देश में खोए हुए बच्चों का पता लगाने में सहायता मिलेगी। इस एप को विकसित करने में स्वयंसेवी संगठन ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ और ‘कैपजेमिनी’ (Capgemini) ने सहायता की है।

बच्चों की सुरक्षा के संदर्भ में ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ (Bachpan Bachao Andolan -BBA) भारत का सबसे बड़ा आंदोलन है। बीबीए ने बच्चों के अधिकारों के संरक्षण से संबंधित कानून निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आंदोलन 2006 के निठारी मामले से शुरू हुआ है।

शनि ग्रह के उपग्रह इंसेलेडस पर मिले जीवन के संकेत

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के कैसिनी अंतरिक्ष यान द्वारा एकत्रित डाटा का अध्ययन करने के बाद शनि के उपग्रह इंसेलेडस पर जीवन की संभावना के संकेत मिले हैं। शोधकर्त्ताओं के अनुसार, इंसेलेडस की बर्फीली सतह पर कई दरारें पाई गई हैं, जिनमें जैविक कार्बनिक अणुओं की खोज की गई है

इससे पहले वहाँ  महासागर होने के भी सबूत मिले थे। पृथ्वी के महासागरों में रहने वाले सूक्ष्म जीवों को हाइड्रोजन से ही रासायनिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस आधार पर माना जा रहा है कि शनि के उपग्रह पर भी सूक्ष्मजीव हो सकते हैं।